Padmavat Media
महत्वपूर्ण सूचना
राजस्थान

शिव भक्तों की आस्था का केंद्र : कल्याणपुर का श्यामक नाथ धाम 

Reported By : Padmavat Media
Published : February 25, 2025 3:21 PM IST

महाशिवरात्रि विशेष

शिव भक्तों की आस्था का केंद्र : कल्याणपुर का श्यामक नाथ धाम 

उदयपुर । जिला मुख्यालय से 77 किलोमीटर दूर ऋषभदेव तहसील का कल्याणपुर कस्बा इतिहासविदों के अनुसार आठवीं शताब्दी में गुहिलों की राजधानी रही किष्किंधापुरी के अवशेषों से आवृत्त है। इन्हीं अवशेषों में से एक है भगवान शिव की सुंदर प्रतिमा जो कि ग्राम पंचायत के उत्तरी द्वार के रूप में विद्यमान प्रसिद्ध पंचमुखी श्यामक नाथ महादेव के मंदिर में अवस्थित है। मंदिर में प्रतिष्ठित शिव की यह पंचमुखी प्रतिमा अपने सौम्य रूप से न केवल श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है वरन भक्तों को भक्ति में निमग्न होने का अवसर भी प्रदान करती हैं। भगवान श्यामक नाथ की इस प्रतिमा में उत्कीर्ण ये पाँच मुख पाँच दिशाओं और पाँच तत्वों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन पाँच मुखों के नाम सद्योजात, वामदेव, अघोर, तत्पुरुष और ईशान हैं। सद्योजात मुख पश्चिम दिशा का प्रतिनिधित्व करता है और पृथ्वी तत्व का अधिपति है। यह मुख सृष्टि की रचना का प्रतीक है। सद्योजात मुख से भगवान शिव ने सृष्टि की रचना की थी। वामदेव मुख उत्तर दिशा का प्रतिनिधित्व करता है और जल तत्व का अधिपति है। यह मुख पालन का प्रतीक है। वामदेव मुख से भगवान शिव ने सृष्टि का पालन किया। अघोर मुख दक्षिण दिशा का प्रतिनिधित्व करता है और अग्नि तत्व का अधिपति है। यह मुख संहार का प्रतीक है। अघोर मुख से भगवान शिव ने सृष्टि का संहार किया। तत्पुरुष मुख पूर्व दिशा का प्रतिनिधित्व करता है और वायु तत्व का अधिपति है। यह मुख तिरोभाव का प्रतीक है। तत्पुरुष मुख से भगवान शिव ने आत्माओं को एक शरीर से दूसरे शरीर में स्थानांतरित किया।

ईशान मुख ऊर्ध्व दिशा का प्रतिनिधित्व करता है और आकाश तत्व का अधिपति है। यह मुख अनुग्रह का प्रतीक है। ईशान मुख से भगवान शिव ने जीवों को आशीर्वाद दिया और उन्हें मोक्ष का मार्ग दिखाया। भगवान शिव के इसी पंचमुखी स्वरूप के दर्शन के लिए दूर दूर से श्रद्धालु नियमित रूप से यहां पहुंचते हैं। इस प्रतिमा की तुलना काठमांडू नेपाल तथा मंदसौर मध्यप्रदेश स्थित पशुपतिनाथ मंदिर से की जा सकती है। इसी श्यामकनाथ महादेव परिसर में ग्राम पंचायत द्वारा प्रति वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को महाशिवरात्रि पर्व पर दो दिवसीय मेले का आयोजन किया जाता है जिसमे हज़ारों श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती हैं। महाशिवरात्रि पर्व पर दिन भर की पूजा अर्चना के बाद शाम को महाआरती तथा रात्रि में भजन कीर्तन का आयोजन भी होता है जिसमें स्थानीय कलाकारों की भजन मंडली द्वारा शिव को समर्पित लोक भजनों का गायन भी होता है।यहां स्थित जागेश्वर महादेव मंदिर में भी महाशिवरात्रि को विविध आयोजन होते है जहां शिल्प के बेजोड़ नमूने के तौर पर भगवान विष्णु की मनोहारी प्रतिमा के साथ साथ विशाल नंदीश्वर की प्रतिमा भी विद्यमान है जो आठवी शताब्दी के शिल्प का गौरव गान करती है। वर्तमान कल्याणपुर व तत्कालीन किष्किन्धापुरी को लेकर मान्यता यह भी है कि आठवीं सदी में मूर्ति शिल्प का केंद्र थी इसी वजह से यहां से श्यामकनाथ महादेव के साथ ही अनेकानेक मूर्तियां प्राप्त हुई है जो आज देश-विदेश के विभिन्न संग्रहालयों की शोभा बढ़ा रही है।

Related posts

रेवेन्यू स्टाफ को मतदाता जागरूकता अभियान के दैनिक आयोजित होने वाली

सलूम्बर पुलिस ने शातिर साईबर ठगों को किया गिरफ्तार

Padmavat Media

देमतीया हनुमान मंदिर का पाटोत्सव आयोजित

Leave a Comment

error: Content is protected !!