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काला गुमान की शान, राजसमंद की पहचान – डाॅ. भगवान दास वैष्णव: एक नाम, जो समाज सेवा का पर्याय बन चुका है।

Reported By : Padmavat Media
Published : April 18, 2025 2:00 PM IST
Updated : April 18, 2025 2:09 PM IST

काला गुमान की शान, राजसमंद की पहचान – डाॅ. भगवान दास वैष्णव: एक नाम, जो समाज सेवा का पर्याय बन चुका है

(एक ऐसा व्यक्तित्व, जिन पर पूरा गांव गर्व करता है)

राजस्थान राज्य के राजसमंद जिले की पावन धरती पर स्थित गांव काला गुमान ने कई रत्नों को जन्म दिया है, परंतु इनमें एक नाम ऐसा है जो समाज सेवा, जनकल्याण और नैतिक मूल्यों की सजीव प्रतिमा बन चुका है — वह नाम है डाॅ. भगवान दास वैष्णव।

डाॅ. भगवान दास वैष्णव सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि एक प्रेरणा हैं। इनका जीवन समाज सेवा को समर्पित है। बाल्यकाल से ही इन्हें जनसेवा का संस्कार मिला, और उसी भावना को आत्मसात करते हुए इन्होंने अपने जीवन को गांव, समाज और राष्ट्र की सेवा में अर्पित कर दिया। शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पर्यावरण, युवा उत्थान और महिला सशक्तिकरण जैसे अनेक क्षेत्रों में इन्होंने अपनी अमिट छाप छोड़ी है।

संघर्षों से सफलता तक की कहानी
अत्यंत साधारण परिवार में जन्मे डाॅ. भगवान दास ने कठिन परिस्थितियों में भी शिक्षा प्राप्त कर उच्च अध्ययन किया। उन्होंने अपनी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास से वह मुकाम हासिल किया, जहां से अब वे दूसरों का मार्गदर्शन करते हैं। डॉक्टर की उपाधि प्राप्त करने के बाद भी उनका झुकाव हमेशा सामाजिक सेवा की ओर रहा। उन्होंने अपने ज्ञान और योग्यता का प्रयोग समाज के वंचित, जरूरतमंद और असहाय वर्ग के लिए किया।

जनसेवा के प्रति समर्पण
काला गुमान गांव में स्वास्थ्य शिविर, नि:शुल्क दवाइयों का वितरण, गरीब परिवारों की सहायता, वृद्धजन सेवा, वृक्षारोपण अभियान, बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के कार्यक्रम – ये सब उनके प्रयासों की केवल एक झलक हैं। चाहे कोई बीमार हो, किसी को कानूनी सहायता चाहिए हो, या कोई युवा मार्गदर्शन की तलाश में हो – डाॅ. भगवान दास हमेशा सबसे पहले खड़े नजर आते हैं।

वे संकट की घड़ी में ढाल बनकर खड़े रहते हैं और खुशियों के समय सबसे पहले मुस्कान बांटने पहुंचते हैं। उनकी पहल से कई परिवारों की जिंदगी बदली है – कई गरीब बच्चों ने शिक्षा पाई, कई बीमारियों का इलाज हुआ, और कई निराश चेहरों पर उम्मीद की किरण जगी।

युवा शक्ति के प्रेरणास्त्रोत
डाॅ. भगवान दास ने गांव के युवाओं को सकारात्मक दिशा देने के लिए कई प्रयास किए हैं। वे स्वयं एक आदर्श बनकर युवा पीढ़ी को शिक्षा, रोजगार और नैतिकता की राह पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। वे मानते हैं कि यदि युवा जाग जाएं, तो गांव से लेकर देश तक परिवर्तन सुनिश्चित है।

सादगी और समर्पण की मिसाल
उनका रहन-सहन अत्यंत सादा है, पर विचारों में विशालता है। वे हमेशा गांव के हर व्यक्ति से स्नेह और सम्मान से मिलते हैं, चाहे वह कोई किसान हो या मजदूर। उनका उद्देश्य केवल समाज को कुछ देना है – बिना किसी स्वार्थ के, बिना किसी पद की चाह के।

सम्मान और सराहना
आज डाॅ. भगवान दास वैष्णव को ना केवल काला गुमान गांव, बल्कि पूरे राजसमंद जिले में एक समर्पित समाजसेवी, सजग नागरिक और सच्चे राष्ट्रभक्त के रूप में जाना जाता है। उन्हें कई सामाजिक संगठनों, संस्थाओं और प्रशासन द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।

उनकी बातें केवल भाषण नहीं होती, बल्कि उनके कार्य बोलते हैं। वे समाज में बदलाव के वाहक हैं – एक ऐसे दीपक, जिनसे हजारों दीप जलते हैं।

गांव की शान, समाज की आन – डाॅ. भगवान दास वैष्णव
आज यदि कोई पूछे कि काला गुमान की असली पहचान क्या है, तो हर जुबां पर एक ही नाम आता है – डाॅ. भगवान दास वैष्णव। वे उस दीपक की तरह हैं, जो स्वयं जलकर औरों को रोशनी देता है। उनके कार्य, उनकी सोच और उनका समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल है।

हमारा सौभाग्य है कि डाॅ. भगवान दास जैसे महान व्यक्तित्व हमारे गांव में हैं। कला गुमान गांव को उन पर गर्व है – और यह गर्व हमेशा बना रहेगा।

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