पीयूष सिंह पटेल बने छात्रों के हक की बुलंद आवाज, हर शिकायत का तुरंत समाधान!
नई दिल्ली । जब छात्रों की समस्याओं को अनदेखा किया जाता है, जब उनकी आवाज़ प्रशासन तक नहीं पहुंचती, तब एक नाम उनके अधिकारों की रक्षा के लिए सबसे आगे खड़ा होता है—पीयूष सिंह पटेल। एंटी करप्शन एंड क्राइम कंट्रोल कमेटी के छात्र सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में उन्होंने छात्रों के हितों की सुरक्षा और उनकी शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए खुद को पूरी तरह समर्पित कर दिया है।
छात्रों के लिए ढाल, हर समस्या का तुरंत हल!
पीयूष सिंह पटेल ने छात्रों के मुद्दों को हल करने के लिए एक मजबूत तंत्र विकसित किया है। चाहे कॉलेज प्रशासन की लापरवाही हो, परीक्षा से जुड़ी समस्याएं हों, छात्रवृत्ति में देरी हो, या फिर किसी भी तरह का अन्याय—वे बिना समय गंवाए तुरंत हस्तक्षेप करते हैं और समाधान करवाते हैं। उनकी इस सक्रियता के कारण हजारों छात्रों को राहत मिली है।
प्रशासन पर सीधा दबाव, लापरवाही बर्दाश्त नहीं!
उनकी कार्यशैली का सबसे बड़ा पहलू यह है कि वे प्रशासन से सीधी बात करते हैं और किसी भी देरी या लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करते। जब कोई छात्र उनसे संपर्क करता है, तो वे तत्काल संबंधित विभाग से जवाबदेही तय कराते हैं और समस्या का समाधान करवाने तक चैन से नहीं बैठते।
भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ अडिग योद्धा!
पीयूष सिंह पटेल सिर्फ शिकायतों के निवारण तक सीमित नहीं रहते, बल्कि शिक्षा क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ भी खुलकर लड़ाई लड़ रहे हैं। उनका लक्ष्य है कि हर छात्र को न्याय मिले और कोई भी शिक्षा से वंचित न रहे। वे परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, कॉलेज प्रशासन की जवाबदेही और छात्रवृत्ति योजनाओं के सही क्रियान्वयन के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं।
छात्रों के लिए संकल्प, हर समस्या का होगा समाधान!
उनका मानना है कि छात्र ही देश का भविष्य हैं और उनकी शिक्षा और अधिकारों की रक्षा करना सबसे महत्वपूर्ण कार्य है। वे चाहते हैं कि हर छात्र को उसकी मेहनत का पूरा हक मिले और उसे किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
“समस्या कोई भी हो, समाधान मिलेगा जरूर!”
पीयूष सिंह पटेल का स्पष्ट संदेश है—
“छात्रों की कोई भी समस्या छोटी नहीं होती। अगर कोई परेशानी में है, तो हम उसे न्याय दिलाएंगे। किसी भी छात्र की आवाज दबने नहीं देंगे, बल्कि उसे और बुलंद करेंगे!”
उनकी कार्यशैली और संघर्ष ने उन्हें छात्रों के सच्चे नेता और मार्गदर्शक के रूप में स्थापित कर दिया है। वे सिर्फ एक प्रतिनिधि नहीं, बल्कि छात्र अधिकारों के सशक्त प्रहरी बन चुके हैं, जो शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने की दिशा में लगातार प्रयासरत हैं।