रामसर वेटलैंड सिटी उदयपुर में जल संसाधन प्रबंधन पर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित
उदयपुर । विद्या भवन पॉलिटेक्निक में “एकीकृत जल संसाधन एवं आयड़ नदी बेसिन मूल्यांकन” पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें जल प्रबंधन विशेषज्ञों, पर्यावरणविदों और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह बैठक “ग्रीन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप” के अंतर्गत भारत और डेनमार्क के सहयोग से संपन्न हुई, जिसमें उदयपुर की जल संरचनाओं के संरक्षण और सतत प्रबंधन पर गहन चर्चा की गई।
इस अवसर पर होटल एसोसिएशन उदयपुर के उपाध्यक्ष एवं बिजनेस सर्कल इंडिया के चार्टर प्रेसिडेंट यशवर्धन राणावत ने अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने झीलों की सफाई के लिए नवीनतम तकनीकों और स्थायी समाधान पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “उदयपुर की झीलें केवल शहर की सुंदरता का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि यह पेयजल का भी एक प्रमुख स्रोत हैं। इनका संरक्षण हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।राणावत ने सुझाव दिया की जल स्रोतों को एडॉप्शन के तहत अत्याधुनिक तरीके से रखरखाव के लिए दिया जाना चाहिए, जिसमें बड़े कॉर्पोरेट घरानों, विदेशी विशेषज्ञों और स्थानीय बुद्धिजीवियों का पैनल तैयार कर धरातल पर कार्यों का क्रियान्वयन होना चाहिए ।विकसित देशों में झीलें बहुत स्वच्छ होती हैं, उन्हें उदाहरण के तौर पर आमंत्रित किया जा सकता है ।’’ गौरतलब है की राणावत ने राजस्थान सरकार से पिछोला झील के पूर्णोधार के लिए बजट 2025 में पचास करोड़ रुपयों की माँग की है।
बैठक में विद्या भवन पॉलिटेक्निक के प्राचार्य डॉ. अनिल मेहता, डॉ कार्स्टेन एच जेनसन, प्रोजेक्ट लीड, यूनिवर्सिटी ऑफ़ कोपेनहेगन डेनमार्क, झील संरक्षण समिति के जल विशेषज्ञ तेजशंकर पालीवाल, होटल एसोसिएशन उपाध्यक्ष और बीसीआई टूरिज्म चार्टर अध्यक्ष यशवर्धन राणावत, विद्या भवन सोसाइटी सीईओ राजेंद्र भट्ट और अध्यक्ष जितेंद्र तायलिया सहित कई प्रमुख गणमान्यजन उपस्थित रहे। सभी विशेषज्ञों ने झीलों की स्वच्छता, जल पुनर्भरण तकनीकों और जल स्रोतों के सतत उपयोग पर अपने विचार रखे।
उल्लेखनीय है कि यह बैठक “रामसर वेटलैंड सिटी – उदयपुर वाटर फोरम” के अंतर्गत आयोजित की गई थी, जिसमें जल संसाधन प्रबंधन की वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। इस चर्चा के निष्कर्षों के आधार पर, उदयपुर के जल निकायों के संरक्षण और पुनरोद्धार के लिए ठोस कार्ययोजनाएं तैयार की जाएंगी।
