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Muharram 2025: इमाम हुसैन की याद में एकता, स्वच्छता और नागरिक चेतना का संकल्प

Reported By : Padmavat Media
Edited By : Padmavat Media
Published : July 6, 2025 12:07 AM IST
Updated : July 19, 2025 1:03 AM IST

उदयपुर केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि विविध संस्कृति, गहन आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक है। मोहर्रम के दौरान जब देश-विदेश से पर्यटक यहां आएं, तो उन्हें दिखे अनुशासन, स्वच्छता और गरिमा से ओत-प्रोत आयोजन।

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Muharram 2025: इमाम हुसैन की याद में एकता, स्वच्छता और नागरिक चेतना का संकल्प

उदयपुर मंथन – एक संवाद
लेखक: यशवर्धन राणावत
उपाध्यक्ष, होटल एसोसिएशन उदयपुर
उदयपुर मोहर्रम का चाँद जैसे ही शहर की फिजाओं में नजर आता है, उदयपुर की आत्मा श्रद्धा और संवेदना से सराबोर हो उठती है। यह वार्षिक जुलूस न केवल इमाम हुसैन के सर्वोच्च बलिदान की याद है, बल्कि उनके द्वारा दिखाए गए मार्ग शांति, सत्य और अन्याय के विरुद्ध अडिग खड़े रहने का भी प्रतीक है।
लेकिन इस वर्ष मोहर्रम को एक नई दृष्टि से देखने और जीने की जरूरत है। यह केवल रस्म न रह जाए, बल्कि जन चेतना का एक ऐसा अवसर बने जो उदयपुर की सामाजिक संरचना में एक सकारात्मक बदलाव की नींव रखे। जब हजारों लोग पुराने शहर की गलियों से गुजरें, तो यह भीड़ एक चेतना का रूप ले ऐसा स्वरूप जो शहर को साफ, सजीव और सुसंस्कृत बनाने की दिशा में आगे बढ़े।

रिवायत से नागरिक दायित्व की ओर

मोहर्रम के दिन जैसे ही मातमी धुनें और श्रद्धा के स्वर गलियों में गूंजेंगे, वैसा ही आत्ममंथन भी जरूरी है:

  • क्या यह जनसमूह यह प्रण नहीं ले सकता कि हमारी गलियां हर दिन स्वच्छ रहें?
  • क्या लाउडस्पीकरों से केवल मातम नहीं, बल्कि सौहार्द, सहिष्णुता और जागरूकता का संदेश भी नहीं प्रसारित किया जा सकता?
  • क्या यह प्रतीकात्मक यात्रा सार्वजनिक स्थलों के सम्मान, ट्रैफिक नियमों के पालन और धार्मिक सहिष्णुता के संदेश की वाहक नहीं बन सकती?
मोहर्रम 2025 को केवल स्मरण का दिन नहीं, बल्कि ज़िम्मेदारी के संकल्प का दिन बनाना होगा — ऐसा दिन जो उदयपुर के नागरिक पुनर्जागरण का आरंभ बने।
पर्यटन और परंपरा: सहअस्तित्व की प्रेरणा
उदयपुर केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि विविध संस्कृति, गहन आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक है। मोहर्रम के दौरान जब देश-विदेश से पर्यटक यहां आएं, तो उन्हें दिखे अनुशासन, स्वच्छता और गरिमा से ओत-प्रोत आयोजन।
यह जुलूस ऐसा हो कि हर पर्यटक कहे — हमने एक ऐसा शहर देखा जहां आस्था में मर्यादा है, परंपरा में संवेदना है और आयोजन में सामाजिक जिम्मेदारी है।
युवा बनें परिवर्तन के वाहक
अब समय है जब उदयपुर का युवा वर्ग आगे आए और इस आयोजन को एक सामाजिक आंदोलन में बदल दे। धर्म, जाति या वर्ग की सीमाएं पार कर सभी मिलकर यह संकल्प लें:
● जुलूस के बाद स्वयं सफाई अभियान चलाएं
● ट्रैफिक और भीड़ नियंत्रण में प्रशासन को सहयोग करें
● प्याऊ लगाकर लोगों को शीतल जल पिलाएं
● हाथों में संदेशवाहक बैनर लेकर खड़े हों:
उदयपुर हर आस्था का सम्मान करता है, और हर कोने की स्वच्छता का रखवाला है।
इससे युवा केवल सहभागी नहीं, सामाजिक नेतृत्वकर्ता बनेंगे — एक नई चेतना के नायक।
इतिहास गवाह बने – यह मोहर्रम कुछ अलग था
मोहर्रम 2025 को उदयपुर केवल याद न रखे, बल्कि उस पर गर्व करे। यह वर्ष एक नया अध्याय बने जिसमें शहरवासियों ने मिलकर एक ऐसे आयोजन को जन्म दिया जो श्रद्धा के साथ-साथ स्वच्छता, अनुशासन और जागरूकता की मिसाल बन गया।
हर दुकानदार, राहगीर, पर्यटक और नागरिक इस जुलूस का साक्षी बने — एक ऐसा आयोजन जो एकता का प्रतीक, नागरिक मर्यादा का परिचायक और स्वच्छ उदयपुर की दिशा में पहला सशक्त कदम बने।
एक अपील
इस मोहर्रम आइए, परंपरा के साथ-साथ अपने सामाजिक दायित्व को भी निभाएं। उदयपुर को सिर्फ सुंदर बनाए रखना ही नहीं, उसे ज़िम्मेदार भी बनाना है। यह लेख एक सामाजिक जागरूकता अभियान का हिस्सा है। कृपया इसे साझा करें, चर्चा करें और बदलाव की इस मुहिम में सहभागी बनें।

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