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‘रक्षा’ एआई टूल से महाराष्ट्र में बाल संरक्षण को नया बल, बाल अपराधों पर लगेगी प्रभावी रोक

Reported By : Padmavat Media
Published : January 15, 2026 4:45 PM IST

बाल तस्करी, बाल विवाह और बाल यौन शोषण सामग्री पर रोक में बनेगा कारगर हथियार

रक्षा’ एआई टूल से महाराष्ट्र में बाल संरक्षण को मिलेगा नया बल

मुंबई। बच्चों के विरुद्ध बढ़ते अपराधों जैसे बाल तस्करी, बाल विवाह तथा बाल यौन शोषण सामग्री के प्रसार से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित ‘रक्षा’ टूल का राष्ट्रव्यापी शुभारंभ किया गया है। यह टूल महाराष्ट्र के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकता है, जहां बच्चों के खिलाफ अपराधों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो 2023 के अनुसार, देशभर में दर्ज 1,77,335 अपराधों में से अकेले महाराष्ट्र में 22,390 मामले दर्ज किए गए।

यह अत्याधुनिक एआई टूल ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन’ द्वारा विकसित किया गया है, जो देशभर के आंकड़ों का विश्लेषण कर वास्तविक समय में संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, जोखिमग्रस्त परिवारों का पता लगाने और संगठित तस्करी अपराधों की निगरानी में सहायता करता है। उन्नत तकनीक के माध्यम से यह टूल हॉटस्पॉट मैपिंग, डेटा विश्लेषण और ट्रैकिंग की सुविधा प्रदान करता है।

‘रक्षा’ टूल का शुभारंभ ‘प्रॉस्पेरिटी फ्यूचर्स: चाइल्ड सेफ्टी टेक समिट’ में किया गया, जो एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का आधिकारिक प्री-समिट आयोजन था। यह सम्मेलन जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन द्वारा रणनीतिक साझेदार इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन के सहयोग से तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से संबद्धता में आयोजित हुआ।

इस अवसर पर केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी तथा वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि तकनीक का वास्तविक मूल्य तभी है जब वह सबसे कमजोर वर्ग की सुरक्षा करे। बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है और ‘रक्षा’ टूल इसी दिशा में एक सशक्त कदम है।

जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन देश के सबसे बड़े बाल संरक्षण नेटवर्क में से एक है, जिसमें 250 से अधिक नागरिक समाज संगठन शामिल हैं और यह 451 जिलों में सक्रिय है। अकेले महाराष्ट्र में इसके 17 गैर-सरकारी साझेदार 30 जिलों में कार्यरत हैं। राज्य में 2021 में बच्चों के विरुद्ध अपराधों की संख्या 17,261 थी, जो 2022 में बढ़कर 20,762 हो गई, जिससे समय पर हस्तक्षेप की आवश्यकता और भी स्पष्ट होती है।

जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा कि ‘रक्षा’ टूल भारत को बाल संरक्षण के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व प्रदान करेगा। यह तकनीक हर उस बच्चे और परिवार तक पहुंचने में सहायक होगी जिसे देखभाल और सुरक्षा की आवश्यकता है। डेटा को ज्ञान और कार्रवाई में बदलकर यह प्रणाली न्याय तक पहुंच, सेवा वितरण और बच्चों के सुरक्षित भविष्य को मजबूत करेगी।

‘रक्षा’ टूल तीन प्रमुख स्तंभों—पूर्वानुमान, रोकथाम और संरक्षण—पर आधारित है। पहला घटक परिवारों की आर्थिक असुरक्षा को कम कर बाल विवाह की रोकथाम करता है। दूसरा घटक संगठित बाल तस्करी को पहले ही पहचानकर रोकने तथा वित्तीय लेनदेन के माध्यम से अपराध नेटवर्क को उजागर करने में सहायक है। तीसरा घटक डिजिटल बाल संरक्षण को मजबूत करते हुए बाल यौन शोषण सामग्री से जुड़े ऑनलाइन क्षेत्रों और गतिविधियों का विश्लेषण करता है।

बाल संरक्षण के क्षेत्र में यह पहल कानून प्रवर्तन एजेंसियों, समुदायों और जमीनी संगठनों के लिए एक महत्वपूर्ण साधन साबित होने की उम्मीद है, जो महाराष्ट्र सहित पूरे देश में बच्चों के सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाएगा।

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