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उदयपुर की शर्मनाक हकीकत: कचरे में भोजन खोजती गौमाताओं की करंट लगने से मौत — प्रशासन बेख़बर

Reported By : Padmavat Media
Edited By : Padmavat Media
Published : June 18, 2025 8:07 PM IST
Updated : July 19, 2025 1:04 AM IST
गौमाताओं की करंट लगने से मौत

उदयपुर की शर्मनाक हकीकत: कचरे में भोजन खोजती गौमाताओं की करंट लगने से मौत — प्रशासन बेख़बर

यशवर्धन राणावत

उदयपुर । बार-बार चेतावनी और गुहार के बावजूद, उदयपुर में फैले खुले कचरे के ढेर आज भी मौत का कारण बन रहे हैं। इस बार बलि चढ़ी हमारी पूज्यनीय गौमाता।

बोहरा गणेश जी रोड, सुंदरवास क्षेत्र में तीन गायों की करंट लगने से मौत हो गई जब वे खुले कचरे के ढेर में भोजन तलाश रही थीं। यह घटना न केवल दुःखद है, बल्कि उदयपुर प्रशासन की लापरवाही और संवेदनहीनता को भी उजागर करती है।

पर्यटन विशेषज्ञ यशवर्धन राणावत, जो होटल एसोसिएशन उदयपुर के उपाध्यक्ष और अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के संभागीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष भी हैं, इस मुद्दे को कई बार उठा चुके हैं। उन्होंने और उनकी टीम ने प्रशासन के साथ कई बार औपचारिक बैठकें की हैं और यह मामला जन-सुनवाई में सांसद, विधायक और जिला कलेक्टर के समक्ष अलग से भी रखा है।

राणावत ने स्पष्ट कहा है कि खुले कचरे के ढेर एक दुष्चक्र बनाते हैं, जिसमें आवारा कुत्ते, सुअर और गाय भोजन की तलाश में इकट्ठा होते हैं। इससे पहले, शहर में कई स्थानों पर ऐसे कचरे के पास कुत्तों ने पर्यटकों और नागरिकों को काटा है और पशु वाहन दुर्घटना का कारण भी बने हैं ।

राणावत के शब्दों में यह सिर्फ स्वच्छता का नहीं, जन सुरक्षा, पर्यटन की छवि, और निर्दोष पशुओं की पीड़ा का सवाल है। यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं हमारी सनातन संस्कृति और गौ माता के प्रति श्रद्धा की घोषणाओं से सीधा विश्वासघात है।

गौ-रक्षा के नाम पर झंडा उठाने वाले अब कहां हैं? राणावत बात का समर्थन करते हुए मानवाधिकार संगठन के संभागीय अध्यक्ष विकास गौड़, एंटी करप्शन एंड क्राइम कंट्रोल कमेटी मीडिया सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन जैन पदमावत, पर्यटन व्यवसाय से जुड़े सुलतान सिंह देओल, प्रद्युमन सिंह चौहान, संयम जैन, आदित्य सिंह पंवार, चिन्मय दीक्षित, ओमप्रकाश राठौड़, निखिल साहू इत्यादि ने कहा कि पर्यटन हितधारक तो इस मुद्दे को कई बार उठा चुके हैं, जागना उदयपुर के प्रशासन और नगरनिगम को है। प्रशासन को तत्काल खुले में फैले कचरे के लिए उपयुक्त स्थान की व्यवस्था कर कूड़ापात्र लगाने चाहिए, यह उदयपुर की जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ है । प्रशासन क्यों इस काम को त्वरित रूप से नहीं कर पा रहा है, यह एक अत्यंत विचारणीय और स्तब्ध कर देने वाला विषय है । क्या यही आधुनिक भारत, स्वच्छ भारत और मिशन 2047 है ?

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