गुरु पूर्णिमा पर यशवर्धन राणावत का प्रेरणादायी संदेश : उदयपुर केवल पर्यटन स्थल नहीं, एक जीवंत गुरु है
– मेवाड़ की धरती जीवन दर्शन की शिक्षा देती है, इसे स्वच्छता और संस्कारों से संवारना हम सभी का कर्तव्य
उदयपुर । गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर होटल एसोसिएशन उदयपुर के उपाध्यक्ष एवं एंटी करप्शन एंड क्राइम कंट्रोल कमेटी के बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, पर्यटन विशेषज्ञ यशवर्धन राणावत ने समस्त उदयपुरवासियों को शुभकामनाएँ प्रेषित कीं। उन्होंने अपने संदेश में गुरु पूर्णिमा को केवल शिक्षकों के प्रति आभार प्रकट करने का दिवस नहीं, बल्कि मेवाड़ की महान परंपराओं को स्मरण करने का अवसर बताया।
राणावत ने कहा कि “मेवाड़ की धरती सदियों से एक जीवित विश्वविद्यालय की भांति रही है। यहां की हवेलियाँ, मंदिर, महल, झीलें और जलाशय – सभी हमें जीवन जीने की कला सिखाते हैं। महाराणा उदय सिंह से हमें दूरदर्शिता और विकास की प्रेरणा मिलती है, महाराणा प्रताप से साहस, स्वाभिमान और धर्मरक्षा का पाठ मिलता है। वहीं महाराणा फतेह सिंह हमें संस्कृति की रक्षा का संदेश देते हैं और मेवाड़ की रानियाँ भक्ति, त्याग और बलिदान की जीवंत प्रतिमाएं हैं। मेवाड़ के सभी महाराणाओं और महापुरुषों से साधारण जीवनशैली, अदम्य साहस और समर्पण भाव सीखते हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि “आज उदयपुर केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि एक जीवंत गुरु है जो भारतीय संस्कृति, मूल्यों और सौंदर्य का विश्वभर में प्रचार-प्रसार करता है। जब लाखों पर्यटक यहां आते हैं, तो वे केवल झीलें और महल नहीं, बल्कि हमारी जीवनशैली, स्वच्छता और शुचिता को भी अनुभव करते हैं।”
अपने संदेश के अंत में राणावत ने शहरवासियों से आग्रह किया कि “इस गुरु पूर्णिमा पर हम यह संकल्प लें कि अपने कर्म, आचरण और सेवा के माध्यम से उदयपुर को और ऊँचाइयों तक पहुँचाएँगे। हमारा लक्ष्य यह होना चाहिए कि पर्यटन केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि एक संस्कार बने और उदयपुर फिर एक बार अपनी आत्मा के बल से विश्व गुरु बनकर खड़ा हो। हम सब मिलकर शहर की स्वच्छता, गरिमा और राष्ट्रभक्ति को अपने कार्यों से चरितार्थ करें।”
गुरु पूर्णिमा पर यशवर्धन राणावत का प्रेरणादायी संदेश : उदयपुर केवल पर्यटन स्थल नहीं, एक जीवंत गुरु है
Published : July 9, 2025 11:16 PM IST
Updated : July 9, 2025 11:35 PM IST

