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रक्षाबंधन का धागा नहीं, मौन विश्वास है

Reported By : Padmavat Media
Published : August 27, 2026 11:12 AM IST

स्नेह, विश्वास और निश्छल रिश्ते की पवित्र पहचान को शब्द देती डॉ. मीना बाबेल की भावपूर्ण रचना

साहित्य | कविता | रक्षाबंधन

धागा नहीं, एक मौन विश्वास

मन के कपासी मणियो से
मैंने एक धागा बुन दिया,

दिल के कोमल भावों से
उसे स्नेह से भिगो दिया।

सतरंगी भावों के लिबास से
उसे खूबसूरत सा बना दिया,

हर रंग में विश्वास,
हर गाँठ में उसे बाँध दिया।

एक कलाई पर जाकर,
जब मैंने उसे बाँध दिया।

तो उसी पल एक धागे को
अर्थ निहित रिश्ते का नाम दिया।

रक्षा का वचन लेकर
उसे रक्षाबंधन का नाम दिया।

मौन भावनाओं की भाषा को
एक पवित्र पहचान बना दिया।

ऐ रिश्ते! तेरा नाम हमने
निःशब्द सा कर दिया।

निश्छलता, निःस्वार्थता, अपेक्षा से
ऊपर का अनमोल इनाम दे दिया।

सभी की रगों में फहरा दिया—
यह धागा नहीं, अटूट विश्वास है।

— डॉ. मीना बाबेल
Chairperson, Wing of Future (udan)

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