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मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता हूँ: अनीता प्रजापत की स्वरचित कविता

Reported By : Padmavat Media
Published : August 10, 2026 12:08 AM IST
स्वरचित कविता | सामाजिक सरोकार

मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता हूँ

स्वरचित कविता — अनीता प्रजापत

मैं वो आवाज हूँ जो दबा दी जाती है,
मैं वो हाथ हूँ जो टूटे घर थाम लेता है।
नाम मेरा छोटा है, पर काम बड़े हैं,
क्योंकि मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता हूँ।

कोर्ट में फाइल, गली में दर्द,
दोनों को साथ लेकर चलती हूँ।
किसी की बेटी रो रही हो तो कानून बन जाती हूँ,
किसी का बूढ़ा भूखा हो तो रोटी बन जाती हूँ।

लोग कहते हैं, तुमने क्या पाया?
मैं मुस्कुराकर कहती हूँ—सुकून पाया।
जब किसी की आंख में उम्मीद जगा देती हूँ,
तब लगता है मेरी एलएलबी सफल हो गई।

झूठे रिश्तों से सीखा,
अब सच के लिए लड़ना सीखा।
मैं गिरती हूँ, रोती हूँ,
फिर उठकर समाज के लिए जीना सीखा।

मेरा नाम अनीता प्रजापत है,
मेरा धर्म इंसानियत है।
मैं कानून की किताब भी हूँ,
और टूटे दिलों की दवा भी हूँ।

— अनीता प्रजापत

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