गुजरात विद्यापीठ में ‘सुरक्षित, स्वस्थ एवं समावेशी परिसर’ पर परिसंवाद
अहमदाबाद। शिक्षा दिवस के अवसर पर महात्मा गांधी द्वारा स्थापित गुजरात विद्यापीठ के परिसर में गुजरात सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग तथा जेंडर रिसोर्स सेंटर (जीआरसी) के ‘सेतु’ कार्यक्रम के अंतर्गत ‘सुरक्षित, स्वस्थ एवं समावेशी परिसर’ विषय पर परिसंवाद आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन विदुषी माताजी के आशीर्वाद से किया गया।
परिसंवाद का उद्देश्य विश्वविद्यालय परिसर में लैंगिक संवेदनशीलता, पोषण एवं स्वास्थ्य तथा कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम संबंधी कानून के प्रति जागरूकता बढ़ाना और सुरक्षित, सम्मानजनक एवं समावेशी वातावरण को प्रोत्साहित करना था।
कार्यक्रम में अहिंसा, संयम, समानता, करुणा, स्वास्थ्य और मानवीय गरिमा जैसे मूल्यों को व्यक्तिगत जीवन के साथ संस्थागत संस्कृति का हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि सुरक्षित एवं स्वस्थ वातावरण किसी भी शैक्षणिक संस्थान की महत्वपूर्ण पहचान है।
मुख्य अतिथि ने गुजरात विद्यापीठ को महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा, स्वावलंबन और सामाजिक न्याय के विचारों की जीवंत धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि किसी विश्वविद्यालय की वास्तविक पहचान केवल उसकी उपलब्धियों से नहीं, बल्कि इस बात से होती है कि वहां कार्य करने वाला प्रत्येक व्यक्ति स्वयं को कितना सुरक्षित, सम्मानित और स्वस्थ महसूस करता है।
उन्होंने कहा कि लैंगिक संवेदनशीलता केवल महिलाओं के अधिकारों तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि पुरुषों और महिलाओं के बीच समानता, सम्मान और गरिमा की संस्कृति विकसित करने का माध्यम है। परिसर में भेदभाव रहित और भयमुक्त वातावरण तैयार करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
उन्होंने कहा कि विदुषी माताजी के आशीर्वाद से आयोजित यह कार्यक्रम केवल जागरूकता तक सीमित नहीं है, बल्कि समानता, संवेदनशीलता, अहिंसा और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में सार्थक पहल है। गुजरात विद्यापीठ और जेंडर रिसोर्स सेंटर की इस पहल की सराहना भी की गई।
कार्यक्रम में गुजरात विद्यापीठ के कुलपति, जेंडर रिसोर्स सेंटर के पदाधिकारी, कार्यक्रम समन्वयक डॉ. हसमुख पंचाल, सेतु नोडल अधिकारी डॉ. मंजुला डाभी, विश्वविद्यालय के सेवक, कर्मचारी और अन्य प्रतिभागी उपस्थित रहे।
समापन अवसर पर प्रतिभागियों से परिसंवाद में प्राप्त जानकारी को कार्यस्थल, परिवार और समाज तक पहुंचाने का आह्वान किया गया। साथ ही लैंगिक समानता, सुरक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान की भावना को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प दिलाया गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. हसमुख पंचाल और डॉ. मंजुला डाभी के मार्गदर्शन एवं प्रयासों की सराहना की गई।

