भुगतान से आगे बढ़े फिनटेक क्षेत्र, ऋण, बीमा, बचत, निवेश और पेंशन सेवाओं का करे विस्तार : प्रधानमंत्री मोदी
मुंबई । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत की फिनटेक क्षेत्र में प्रगति उल्लेखनीय है। अब फिनटेक क्षेत्र को डिजिटल भुगतान से आगे बढ़कर ऋण, बीमा, बचत, निवेश और पेंशन जैसी वित्तीय सेवाओं का विस्तार करना चाहिए। डिजिटल इंडिया की सफलता की कहानी का अगला अध्याय फिनटेक क्षेत्र में नई पीढ़ी के नवाचार पर आधारित होगा।
प्रधानमंत्री मंगलवार को मुंबई के बीकेसी में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 के उद्घाटन अवसर पर संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा, ग्लोबल फिनटेक फेस्ट के अध्यक्ष क्रिस गोपालकृष्णन सहित देश-विदेश के फिनटेक नवप्रवर्तक, उद्यमी, निवेशक और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि फिनटेक क्षेत्र में युवाओं की ऊर्जा, नवाचार, जोखिम लेने की क्षमता और बड़े सपने विकसित भारत के भविष्य के प्रति विश्वास को मजबूत करते हैं। वैश्विक स्तर पर संघर्ष और अनिश्चितता के वातावरण के बावजूद भारत ने 7.8 प्रतिशत आर्थिक विकास दर्ज किया है। इससे दुनिया में भारत की विकास क्षमता को लेकर नया विश्वास पैदा हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत की व्यापक आर्थिक स्थिरता और संरचनात्मक सुधारों को मिल रही वैश्विक मान्यता इसका प्रमाण है।
प्रधानमंत्री ने यूपीआई को भारत की फिनटेक सफलता का सबसे बड़ा आधार बताया। उन्होंने कहा कि 25 अगस्त को यूपीआई ने दस वर्ष पूरे किए हैं। एक दशक पहले बैंकिंग सेवाएं आम लोगों की पहुंच में इतनी आसानी से उपलब्ध होने की कल्पना कई लोगों को असंभव लगती थी, लेकिन आज बैंकिंग व्यवस्था से दूर रहे करोड़ों नागरिक फिनटेक विकास के प्रमुख भागीदार बन चुके हैं।
उन्होंने बताया कि अगस्त में यूपीआई के माध्यम से 2,400 करोड़ से अधिक लेनदेन हुए। यूपीआई अब केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि 11 देशों में उपलब्ध है। सिंगापुर के साथ भुगतान प्रणाली का एकीकरण भी किया गया है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भारत को अन्य देशों की भुगतान प्रणालियों के साथ भी जुड़ने का लक्ष्य रखना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि विदेशों में काम करने वाले भारतीयों द्वारा भारत भेजी जाने वाली राशि पर लगने वाली लेनदेन लागत कम करने में यूपीआई महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। भारत को दूसरों द्वारा बनाए गए नियमों और मानकों का उपयोग करने से आगे बढ़कर अपने डिजिटल भुगतान मानक विकसित करने और उन्हें दुनिया से जोड़ने की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि भारतीय फिनटेक क्षेत्र इस क्षमता को साबित कर सकता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि तकनीक वित्तीय समावेशन का प्रभावी माध्यम है। फिनटेक क्षेत्र को उन लोगों तक पहुंचना चाहिए, जहां पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था अभी तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाई है। उन्होंने पीएम स्वनिधि योजना के माध्यम से लाखों पथ विक्रेताओं को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ने में यूपीआई की भूमिका का उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि स्वनिधि लाभार्थियों की औसत वार्षिक आय में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। योजना के कारण उनके आवास, पोषण, स्वास्थ्य सेवाओं और बच्चों की शिक्षा के अवसरों में भी सुधार हुआ है। उन्होंने बताया कि योजना को वर्ष 2030 तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि डिजिटल लेनदेन से छोटे कारोबारियों की आय और खर्च की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध होती है। इससे फिनटेक कंपनियां उनकी जरूरत के अनुसार ऋण, बीमा और अन्य वित्तीय उत्पाद तैयार कर सकती हैं। छोटे कारोबारियों को व्यवसाय विस्तार के लिए आवश्यक सीमित पूंजी पारंपरिक ऋण व्यवस्था की तुलना में अधिक आसानी से उपलब्ध कराने की क्षमता फिनटेक क्षेत्र में है।
उन्होंने फिनटेक कंपनियों से वितरण क्षेत्र में काम करने वाले लोगों, स्वरोजगार करने वालों और अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों को बचत, पेंशन और बीमा जैसी वित्तीय सेवाओं से जोड़ने का भी आह्वान किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि फिनटेक के अगले चरण में एजेंटिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता, टोकनाइजेशन और क्वांटम तकनीक वित्तीय क्षेत्र में बड़े अवसर पैदा कर रही हैं। इन तकनीकों की संभावनाओं को वास्तविक परिणामों में बदलने के लिए फिनटेक उद्योग को कुछ ठोस लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए।
उन्होंने भारत में विश्वस्तरीय साइबर सुरक्षा व्यवस्था विकसित करने, उद्योग के लिए नैतिक डेटा संरक्षण मानक तैयार करने, मजबूत फिनटेक नियामक एवं नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने तथा प्रत्येक फिनटेक कंपनी के पारदर्शी मूल्यांकन के लिए ‘फिनटेक उपभोक्ता संरक्षण सूचकांक’ विकसित करने पर विशेष जोर दिया।
भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि फिनटेक क्षेत्र ने भारत की वित्तीय व्यवस्था में व्यापक बदलाव लाते हुए वित्तीय समावेशन को नई दिशा दी है। तकनीक के माध्यम से वित्तीय सेवाएं नागरिकों तक सरल और किफायती तरीके से पहुंच रही हैं।
उन्होंने कहा कि यूपीआई, आधार आधारित भुगतान प्रणाली और जनधन के माध्यम से विभिन्न वर्गों को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ा जा रहा है। विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को नकदी प्रवाह आधारित ऋण व्यवस्था, खाता समेकक और एकीकृत ऋण सुविधा के माध्यम से बिना या कम जमानत पर ऋण उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है।
उन्होंने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक नियामक सैंडबॉक्स, नवाचार केंद्र और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के माध्यम से नवाचार को प्रोत्साहित कर रहा है। सुरक्षित, विश्वसनीय और समावेशी वित्तीय व्यवस्था के निर्माण के लिए जिम्मेदार नवाचार पर जोर दिया जा रहा है।
ग्लोबल फिनटेक फेस्ट के अध्यक्ष क्रिस गोपालकृष्णन ने कहा कि यह आयोजन वित्त क्षेत्र के भविष्य को आकार देने वाला अंतरराष्ट्रीय विचार मंच है। इसके माध्यम से नीति-निर्माताओं, नियामकों, वित्तीय संस्थानों, फिनटेक कंपनियों, प्रौद्योगिकी क्षेत्र और निवेशकों को एक मंच पर लाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत के फिनटेक विकास की सबसे बड़ी विशेषता वित्तीय समावेशन है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, टोकनाइजेशन और क्वांटम तकनीक के माध्यम से विश्वसनीय, परस्पर जुड़ी और समावेशी वैश्विक वित्तीय व्यवस्था तैयार करने की क्षमता मौजूद है। उन्होंने कहा कि वित्तीय सेवाओं को अधिक समावेशी, तकनीक को अधिक जिम्मेदार और वैश्विक सहयोग को अधिक सार्थक बनाने में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

