राष्ट्रपति को पत्र लिखकर दी जानकारी, कार्यकाल पूरा नहीं करने वाले बने देश के तीसरे उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़
जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति पद से दिया इस्तीफा, स्वास्थ्य कारणों का हवाला
नई दिल्ली। देश के 14वें उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखे गए पत्र में उन्होंने स्वास्थ्य कारणों और चिकित्सकीय सलाह का हवाला देते हुए त्यागपत्र सौंपा। उन्होंने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 67(क) के अंतर्गत यह निर्णय लिया।
राष्ट्रपति को भेजे अपने पत्र में धनखड़ ने लिखा, “स्वास्थ्य की प्राथमिकता और चिकित्सा सलाह का पालन करते हुए मैं भारत के उपराष्ट्रपति पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे रहा हूं।” उन्होंने राष्ट्रपति मुर्मू के साथ-साथ प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद और संसद के सभी सदस्यों का आभार प्रकट करते हुए कहा कि उन्हें जो स्नेह, विश्वास और सम्मान मिला, वह हमेशा उनके हृदय में संचित रहेगा।
धनखड़ ने कहा, “इस महान लोकतंत्र के उपराष्ट्रपति पद पर रहकर जो अनुभव मुझे प्राप्त हुए, वे मेरे लिए अत्यंत मूल्यवान हैं। भारत के आर्थिक विकास और वैश्विक मंच पर बढ़ती प्रतिष्ठा को देखने और समझने का अवसर मिलना मेरे लिए सौभाग्य की बात रही। मुझे भारत के उज्ज्वल भविष्य पर पूर्ण विश्वास है।”
कार्यकाल पूरा नहीं कर पाने वाले तीसरे उपराष्ट्रपति
धनखड़ देश के तीसरे ऐसे उपराष्ट्रपति बन गए हैं, जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा नहीं किया। इससे पूर्व वर्ष 1969 में वी.वी. गिरि ने राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए इस्तीफा दिया था, जबकि 1997 में उपराष्ट्रपति बने कृष्णकांत का 2002 में कार्यकाल के दौरान ही निधन हो गया था।
वर्ष 2022 में बने थे 14वें उपराष्ट्रपति
जगदीप धनखड़ ने 6 अगस्त, 2022 को हुए चुनाव में विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को हराकर भारत के 14वें उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली थी। उन्हें 528 मत मिले थे, जबकि अल्वा को मात्र 182 वोट प्राप्त हुए थे। उपराष्ट्रपति बनने से पूर्व वह पश्चिम बंगाल के राज्यपाल भी रहे।
किसान परिवार से लेकर संविधान के सर्वोच्च मंच तक
18 मई 1951 को राजस्थान के झुंझुनू जिले में एक सामान्य किसान परिवार में जन्मे जगदीप धनखड़ की शिक्षा गांव के सरकारी स्कूल से प्रारंभ हुई। स्कॉलरशिप के माध्यम से उन्होंने चित्तौड़गढ़ के सैनिक स्कूल में दाखिला लिया। उनका चयन नेशनल डिफेंस एकेडमी में भी हुआ, लेकिन उन्होंने वहां प्रवेश नहीं लिया।
इसके बाद उन्होंने जयपुर के महाराजा कॉलेज से बीएससी (ऑनर्स) और राजस्थान यूनिवर्सिटी से एलएलबी की डिग्री हासिल की। राजस्थान हाईकोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में पहचान बनाने के साथ-साथ वह सुप्रीम कोर्ट में भी वकालत करते रहे। वर्ष 1987 में राजस्थान हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भी बने।
देवीलाल से जुड़े, राजनीति में रखा कदमउपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का राष्ट्रपति को संबोधित त्यागपत्र.
धनखड़ की राजनीतिक यात्रा की शुरुआत चौधरी देवीलाल से प्रेरित होकर हुई। वर्ष 1989 में देवीलाल के 75वें जन्मदिन पर वे राजस्थान से 75 गाड़ियों का काफिला लेकर दिल्ली पहुंचे थे। उसी वर्ष वी.पी. सिंह के नेतृत्व वाली जनता दल ने उन्हें झुंझुनू से लोकसभा टिकट दिया, जहां से वे सांसद निर्वाचित हुए और केंद्र सरकार में मंत्री बने।
धनखड़ की राजनीतिक यात्रा में संवैधानिक दायित्वों के साथ-साथ उन्होंने जिस गरिमा और गंभीरता के साथ सार्वजनिक जीवन को जिया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा। उनके इस्तीफे से देश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय का समापन हुआ है।
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