देवघर में संत समाज की ऐतिहासिक घोषणा : कालकानंद गिरी बनीं जमशेदपुर किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर, देश-विदेश से मिल रही बधाइयाँ
देवघर/झारखंड । बाबा बैद्यनाथ की पावन नगरी देवघर में आयोजित एक भव्य धार्मिक समारोह के बीच किन्नर समाज के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया, जब जमशेदपुर निवासी कालकानंद गिरी को विधि-विधान, वैदिक मंत्रोच्चार और संत-महात्माओं की उपस्थिति में जमशेदपुर किन्नर अखाड़ा का महामंडलेश्वर घोषित किया गया। इस ऐतिहासिक घोषणा के साथ ही समारोह स्थल जयकारों और तालियों की गूंज से गुंजायमान हो उठा तथा श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया।

कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक धार्मिक विधियों के साथ विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान संपन्न हुए। अखाड़ा के संतों, महंतों और पदाधिकारियों ने सर्वसम्मति से कालकानंद गिरी को यह महत्वपूर्ण दायित्व सौंपते हुए कहा कि उनका चयन किन्नर समाज के लिए नई दिशा और प्रेरणा का प्रतीक है। संत समाज ने उन्हें आशीर्वाद देते हुए धर्म, सेवा और समाज कल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने का संदेश दिया।
बताया गया कि कालकानंद गिरी लंबे समय से धार्मिक और सामाजिक कार्यों से जुड़ी हुई हैं। किन्नर समाज के उत्थान, धार्मिक परंपराओं के संरक्षण तथा समाज में समानता और सम्मान की भावना को मजबूत करने के लिए वे लगातार सक्रिय रही हैं। उनके इसी समर्पण और सेवा भावना को देखते हुए संत समाज ने उन्हें यह गरिमामय जिम्मेदारी सौंपी है।
महामंडलेश्वर घोषित होने के बाद कालकानंद गिरी ने संत समाज और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पद उनके लिए सम्मान के साथ-साथ एक बड़ी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि वह किन्नर समाज को धार्मिक, सामाजिक और आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य करेंगी तथा समाज में प्रेम, सद्भाव और मानवीय मूल्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास करती रहेंगी।
इस घोषणा के बाद कालकानंद गिरी को देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लगातार बधाइयाँ मिल रही हैं। विभिन्न धार्मिक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और समाज के गणमान्य लोगों ने उन्हें शुभकामनाएँ देते हुए उनके उज्ज्वल नेतृत्व की कामना की है।
एंटी करप्शन एंड क्राइम कंट्रोल कमेटी के मीडिया सेल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. भगवान दास वैष्णव ने भी कालकानंद गिरी को इस महत्वपूर्ण दायित्व के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रेषित कीं। इसके साथ ही उदयपुर एवं राजसमंद जिले सहित कई स्थानों से समाजजनों, धर्मप्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा उन्हें बधाइयाँ दी जा रही हैं।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संत-महात्मा, श्रद्धालु और समाज के गणमान्य लोग उपस्थित रहे। समारोह के समापन पर भंडारा एवं प्रसाद वितरण का आयोजन भी किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और उत्साह के साथ भाग लिया। धार्मिक आस्था, परंपरा और सामाजिक समरसता से परिपूर्ण यह आयोजन सभी के लिए एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक अवसर बन गया।

