नासिक में तीन दिवसीय वैराग्य आंदोलन एवं दीक्षा महोत्सव 13 अगस्त से, सीए अशोक लोहडे लेंगे जैन दीक्षा
नासिक। महाराष्ट्र के नासिक जिले स्थित णमोकार तीर्थ, मालसाने (चांदवड) आगामी 13 से 15 अगस्त तक जैन धर्म के एक ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महोत्सव का साक्षी बनेगा। तीन दिवसीय वैराग्य आंदोलन एवं दीक्षा महोत्सव के दौरान प्रतिष्ठित चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक लोहडे सांसारिक जीवन, वैभव, प्रतिष्ठा और मोह-माया का त्याग कर जैन संयम जीवन को अपनाएंगे। यह भव्य आयोजन प.पू. प्रज्ञाश्रमण सारस्वताचार्य श्री 108 देवनन्दिजी गुरुदेव के पावन सान्निध्य एवं मंगल आशीर्वाद में सम्पन्न होगा। आयोजन को लेकर देशभर के जैन समाज में विशेष उत्साह है तथा हजारों श्रद्धालुओं के नासिक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
संयम का मार्ग चुनकर समाज के लिए प्रस्तुत करेंगे प्रेरक उदाहरण
श्री दिगंबर जैन ग्लोबल महासभा के राष्ट्रीय युवा अध्यक्ष पारस लोहडे ने बताया कि दीक्षार्थी अशोक लोहडे उनके सगे चाचा हैं। उन्होंने कहा कि आज जब अधिकांश लोग भौतिक सुख-सुविधाओं और सांसारिक उपलब्धियों को जीवन का लक्ष्य मान रहे हैं, ऐसे समय में एक सफल चार्टर्ड अकाउंटेंट का सब कुछ त्यागकर संयम और साधना के मार्ग पर अग्रसर होना समाज के लिए अत्यंत प्रेरणादायी है। यह निर्णय त्याग, तप, आत्मसंयम और आत्मकल्याण की महान परंपरा का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि यह दीक्षा महोत्सव युवाओं को यह संदेश देगा कि वास्तविक सुख बाहरी वैभव में नहीं, बल्कि आत्मशांति, संयम और आध्यात्मिक साधना में निहित है। ऐसे आयोजन समाज में नैतिक मूल्यों, संस्कारों और धर्म के प्रति आस्था को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।

तीन दिनों तक होंगे धार्मिक अनुष्ठान और भव्य आयोजन
13 अगस्त (बुधवार) को दोपहर 1 बजे गणधरवलय विधान के साथ महोत्सव का शुभारंभ होगा। रात्रि 8 बजे हल्दी एवं मेहंदी का धार्मिक आयोजन सम्पन्न होगा।
14 अगस्त (गुरुवार) को प्रातः 11 बजे दीक्षार्थी की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसके उपरांत दोपहर 12:55 बजे शुभ मुहूर्त में जैन परंपरा के अनुसार दीक्षा महोत्सव सम्पन्न होगा, जहां अशोक लोहडे संयम जीवन स्वीकार करेंगे।
15 अगस्त (शुक्रवार) को आचार्यश्री जन्मजयंती समारोह, धार्मिक प्रवचन एवं विभिन्न आध्यात्मिक कार्यक्रमों के साथ तीन दिवसीय महोत्सव का समापन होगा।
देशभर से उमड़ेगा श्रद्धा का सैलाब
आयोजन में देशभर से जैन संत-साध्वियां, मुनिराज, आर्यिकाएं, समाज के वरिष्ठजन, विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। आयोजन को भव्य एवं सुव्यवस्थित बनाने के लिए णमोकार तीर्थ ट्रस्ट परिवार द्वारा आवास, भोजन, पेयजल, चिकित्सा, यातायात एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
धर्म, त्याग और आत्मकल्याण का बनेगा महापर्व
पारस लोहडे ने कहा कि जैन परंपरा में दीक्षा केवल सांसारिक जीवन का त्याग नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि, संयम, तप, साधना और मोक्षमार्ग की ओर बढ़ाया गया सर्वोच्च कदम है। उन्होंने जैन समाज सहित सभी धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में णमोकार तीर्थ, मालसाने (चांदवड), नासिक पहुंचकर इस ऐतिहासिक आध्यात्मिक आयोजन के साक्षी बनने का आह्वान किया।

