Padmavat Media
महत्वपूर्ण सूचना
महाराष्ट्र

मुंबई में शंकराचार्य से पूछा गया भावनात्मक सवाल – हिंदू शासन में भी क्यों हो रही अबोल जीवों की हत्या?

Reported By : Pavan Jain Padmavat
Published : July 24, 2025 2:26 AM IST
Updated : July 24, 2025 2:26 AM IST

मुंबई में शंकराचार्य से पूछा गया भावनात्मक सवाल – हिंदू शासन में भी क्यों हो रही अबोल जीवों की हत्या?

प्रेस वार्ता में हार्दिक हुंडिया ने उठाया तीखा मुद्दा, गुरुदेव ने सराहा जनचिंता का स्वर


मुंबई। बोरीवली के कोरा केंद्र में आयोजित एक विशेष पत्रकार वार्ता के दौरान उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर, परमाराध्य परमधर्माधीश, जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती १००८ जी महाराज की उपस्थिति में एक भावनात्मक एवं सामाजिक चेतना से भरा संवाद उस समय सामने आया, जब ऑल इंडिया जैन जर्नलिस्ट एसोसिएशन (आईजा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हार्दिक हुंडिया ने उनसे एक तीखा लेकिन अत्यंत संवेदनशील सवाल पूछ लिया।

पत्रकारों की उपस्थिति में हार्दिक हुंडिया ने शंकराचार्य जी को कोटि-कोटि वंदन अर्पित करते हुए कहा इतिहास साक्षी है कि जब भारत में मुस्लिम शासन था, तब भी जब कहीं हिंसा होती थी, तो हिंदू संत उन शासकों तक जाकर उन्हें रोकने का कार्य करते थे। आज जब भारत में हिंदू शासन है, तब भी अबोल जीवों — विशेष रूप से पक्षियों — की हत्या की घटनाएं निरंतर बढ़ रही हैं। मुझे प्रतीत होता है कि आप यहां शासन को प्रतिबोध (चेतावनी) देने ही आए हैं। ऐसे में मेरी आपसे यह विनम्र जिज्ञासा है — क्या आपको लगता है कि सरकार आपकी बात मानेगी? क्या कबूतरों जैसे निरीह जीवों को न्याय मिलेगा?”

इस सजीव और निर्भीक सवाल पर पूरे हाल में सन्नाटा छा गया और सभी की निगाहें गुरुदेव पर टिकी रहीं। शांत भाव से उत्तर देते हुए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज ने कहा आपकी भावना बहुत अच्छी है।

गुरुदेव के इस उत्तर पर हार्दिक हुंडिया ने विनम्रतापूर्वक कहा मेरी भावना सफल हो, यही मेरी कामना है।

इस संवाद ने जहां एक ओर धार्मिक विमर्श को जनचेतना से जोड़ा, वहीं शासन-प्रशासन की संवेदनशीलता पर भी परोक्ष रूप से सवाल खड़ा किया। हाल के दिनों में मुंबई और अन्य शहरों में कबूतरों सहित अनेक पक्षियों की निर्मम हत्या और क्रूरता से भरे वीडियो सामने आए हैं, जिन पर कोई स्पष्ट प्रशासनिक कार्रवाई न होने से समाज के जागरूक नागरिकों में आक्रोश व्याप्त है।

प्रेस वार्ता में शंकराचार्य जी द्वारा दिए गए उत्तर ने संकेत दिया कि संत समाज भी अब इन गंभीर विषयों पर मुखर हो रहा है। हार्दिक हुंडिया का सवाल न केवल एक पत्रकार का सवाल था, बल्कि यह उस वर्ग की ओर से उठी आवाज़ थी, जो मूक प्राणियों के अधिकारों की बात करता है।

प्रेस वार्ता में उपस्थित पत्रकारों, संतों, सेवाभावी संगठनों व गौभक्तों ने इस सवाल को सामाजिक दृष्टि से अत्यंत प्रासंगिक बताया और आशा व्यक्त की कि गुरुदेव का मार्गदर्शन जनमानस और शासन दोनों को नैतिक दिशा देगा।

Related posts

मुंबई में जल्द ही अंधेरी-पूर्व से दहिसर-पूर्व तक शुरू हो जाएगी मेट्रो-७

Padmavat Media

महाराष्ट्र के इंदापुर में विमान हादसा, खेत में हुई इमरजेंसी लैंडिंग, बाल- बाल बची महिला पायलट

Padmavat Media

पावागढ़ व केसरिया जी के लिए श्री केसरीयानाथ भक्त मंडल कल्याण 31 मार्च को होगा रवाना 

Leave a Comment

error: Content is protected !!