“एसपी-डीएसपी को जेब में रखने” की सोच जहरीली : पुलिस का सम्मान करो, कानून से मत उलझो
नई दिल्ली। देश के विभिन्न हिस्सों से हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो सामने आए हैं, जिनमें कुछ युवा पुलिस प्रशासन को लेकर आपत्तिजनक और गैर-जिम्मेदार टिप्पणियां करते दिखाई दे रहे हैं। इनमें सबसे गंभीर मामला उन वीडियो का है, जिनमें कहा गया नया एसपी आया है, वह सख़्त भी बहुत है, लेकिन एसपी-डीएसपी को हम अपनी तीसरी जेब में रखते हैं। यह कथन न केवल कानून और पुलिस की गरिमा पर चोट करता है, बल्कि समाज में गलत संदेश भी फैलाता है।
एंटी करप्शन एंड क्राइम कंट्रोल कमेटी के मीडिया सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन जैन पदमावत ने इस प्रवृत्ति की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा एसपी और डीएसपी जैसे अधिकारी किसी की जेब में नहीं होते। वे संविधान और कानून के अधीन कार्यरत होते हैं और उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी जनता की सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखना है। पुलिस वर्दी बलिदान, ईमानदारी और निष्ठा का प्रतीक है, जिसका अपमान देश के कानून का अपमान है।
पवन जैन पदमावत ने कहा कि किसी भी राज्य में नया एसपी अगर सख़्त रुख अपनाता है तो यह ईमानदार नागरिकों के लिए सुरक्षा की गारंटी और अपराधियों के लिए साफ़ संदेश है कि अब ढिलाई नहीं होगी। जो लोग इस सख़्ती का मज़ाक उड़ाते हैं, वे कानून की नजरों में खुद को संदेह के घेरे में खड़ा कर रहे हैं।
उन्होंने युवाओं को चेतावनी देते हुए कहा कि सोशल मीडिया कोई निजी अखाड़ा नहीं है। यहां बोले गए शब्द और डाली गई पोस्ट अदालत में सबूत बन सकते हैं। आईटी एक्ट और भारतीय दंड संहिता के तहत पुलिस या प्रशासन की छवि धूमिल करने वाले बयान गंभीर अपराध की श्रेणी में आते हैं और इसके लिए जेल व जुर्माना दोनों का प्रावधान है।
पुलिस प्रशासन ने भी सोशल मीडिया पर कड़ी निगरानी बढ़ा दी है और ऐसे वीडियो या पोस्ट बनाने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
पवन जैन पदमावत ने यह भी कहा कि पुलिस जनता की दुश्मन नहीं, बल्कि उसकी सुरक्षा की सबसे बड़ी गारंटी है। पुलिस बल पर सवाल उठाने या उसकी छवि को धूमिल करने का मतलब है अपने ही सुरक्षा कवच में छेद करना। हर नागरिक का यह नैतिक दायित्व है कि वह कानून और पुलिस का सम्मान करे।
अंत में पवन जैन पदमावत देश के युवाओं से अपील की अपनी ताकत, समय और ऊर्जा का इस्तेमाल पढ़ाई, रोजगार, समाज सेवा और देश निर्माण में करें। कानून से टकराने वाली सोच अंत में बर्बादी की ओर ही ले जाती है। सम्मान दीजिए, तो सम्मान मिलेगा, यही सच्चा नागरिक धर्म है।
जो कहते हैं पुलिस हमारी जेब में है, वे याद रखें। जेल की चाबी भी उसी जेब में आ सकती है। पुलिस का सम्मान करें, कानून को चुनौती देना बंद करें।

