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गुणों को ग्रहण कर सम्यक दर्शन प्राप्त करें : साध्वी जयदर्शिता श्रीजी

Reported By : Padmavat Media
Published : July 24, 2025 2:33 PM IST
आयड़ जैन तीर्थ में चातुर्मासिक प्रवचन में उमड़ा श्रद्धालुओं का भावसागर
साध्वी जयदर्शिता श्रीजी

गुणों को ग्रहण कर सम्यक दर्शन प्राप्त करें : साध्वी जयदर्शिता श्रीजी

उदयपुर । तपागच्छ की उद्गम स्थली आयड़ जैन तीर्थ में श्री जैन श्वेतांबर महासभा के तत्वावधान में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन क्रम में गुरुवार को आत्म वल्लभ सभागार आध्यात्मिक ज्ञान और भक्ति से गुंजायमान हो उठा। कलापूर्ण सूरी समुदाय की साध्वी जयदर्शिता श्रीजी, जिनरसा श्रीजी, जिनदर्शिता श्रीजी एवं जिनमुद्रा श्रीजी आदि साध्वीवृंद के सान्निध्य में श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ अष्ट प्रकार की पूजा, ज्ञान भक्ति एवं जैन ग्रंथों की पूजा-अर्चना की।

प्रवचन का भावपूर्ण संदेश: धर्म से मिलता है मोक्ष का मार्ग

धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वी जयदर्शिता श्रीजी ने कहा, धर्म से ही मोक्ष की प्राप्ति संभव है और धर्म प्राप्ति का सशक्त माध्यम है – साधु-साध्वियों का संघ। उनके सत्संग से ही सम्यक दर्शन, ज्ञान और चारित्र की प्राप्ति होती है।

उन्होंने भगवान ऋषभदेव के जीवन प्रसंगों का उदाहरण देते हुए बताया कि जब धन सार्थवाह अपने परिवार के साथ आचार्य भगवंतों के दर्शन हेतु पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि कोई स्वाध्याय में, कोई वैयावृत्य में तथा कोई ध्यान में लीन है। यह दृश्य देखकर उनका चित्त हिल उठा और उन्हें सम्यक दर्शन की प्राप्ति हुई। साध्वी श्रीजी ने श्रद्धालुओं को प्रेरणा दी कि जब भी संतों के पास जाने का अवसर मिले, उनके गुणों का ग्रहण करना चाहिए, क्योंकि यही गुण आत्मा के जागरण का माध्यम बनते हैं।

उन्होंने कहा हमने हजारों प्रवचन सुने, पर अगर मन चंचल और चित्त अशांत है तो उपदेशों का प्रभाव नहीं होता। धर्म का बोध तभी संभव है जब चित्त उपशांत हो।

भक्ति, साधना और साधुओं की वंदना से भरा वातावरण

गुरुवार सुबह 7 बजे से प्रारंभ हुए कार्यक्रम में आत्म वल्लभ सभागार में ज्ञान पूजा एवं अष्ट द्रव्य पूजा सम्पन्न हुई। साध्वीवृंद के निर्देशन में श्रावक-श्राविकाओं ने पूरे भाव और श्रद्धा से पूजन-अर्चन कर आत्मिक ऊर्जा का अनुभव किया।

सक्रिय सहभागिता व सामाजिक समर्पण

इस अवसर पर अनेक गणमान्य श्रद्धालु एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें श्री कुलदीप नाहर (महामंत्री, श्री जैन श्वेतांबर महासभा), भोपाल सिंह नाहर, अशोक जैन, राजेन्द्र जवेरिया, प्रकाश नागौरी, दिनेश बापना, अभय नलवाया, कैलाश मुर्डिया, चतर सिंह पामेच, गोवर्धन सिंह बोल्या, सतीश कच्छारा, दिनेश भंडारी, रविन्द्र बापना, चिमनलाल गांधी, प्रद्योत महात्मा, रमेश सिरोयाकुलदीप मेहता आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

आगामी प्रवचन श्रृंखला की प्रतीक्षा

चातुर्मासिक प्रवचनमाला के तहत प्रतिदिन सुबह प्रवचन, पूजन और धर्म चर्चा का क्रम चल रहा है। श्रद्धालुओं से आह्वान किया गया है कि वे अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर आध्यात्मिक लाभ लें।

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