शिक्षा और समाजसेवा में अनूठी मिसाल: अनिल स्वर्णकार की 15 वर्षों की निरंतर सेवा ने बदला सैकड़ों बच्चों का भविष्य
उदयपुर/भींडर। किसी समाज की प्रगति उसकी शिक्षा और संस्कार से तय होती है, और शिक्षा के इसी दिव्य मार्ग पर बीते 15 वर्षों से निरंतर चल रहे हैं भींडर नगर के युवा शिक्षक अनिल स्वर्णकार एक ऐसा नाम, जो आज शिक्षा, समाजसेवा और मानवता की मिसाल बन चुका है। स्वर्णकार ने तीन विषयों में एमए और बीएड की उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद केवल शिक्षक बनने का कार्य नहीं किया, बल्कि शिक्षा को जरूरतमंदों तक पहुँचाने को अपना जीवन उद्देश्य बना लिया। इसी समर्पण के चलते 24 नवंबर 2024 को उन्हें आचार्य आदिसागर अंकलीकर अंतर्राष्ट्रीय जागृति मंच, मुंबई द्वारा अंतर्राष्ट्रीय समाज सेवा पुरस्कार और समाज सेवा शिरोमणि उपाधि से सम्मानित किया गया, जो उनके 15 वर्षों की अटूट तपस्या का अभिनंदन है।
दिगंबर जैन आचार्य सुनील सागरजी गुरुदेव से आशीर्वाद प्राप्त कर स्वर्णकार ने 2011 में बडगांव और 2019 में भींडर में दो निजी विद्यालयों की स्थापना की। आज इन संस्थानों में नर्सरी से 8वीं तक 250 से अधिक बच्चे शिक्षा का उजियारा पा रहे हैं। विशेष यह है कि आरंभ से अब तक सभी बच्चों को किताबें, कॉपियां, बैग, यूनिफॉर्म, स्वेटर, जूते, स्टेशनरी जैसी समस्त सामग्री पूर्णतः नि:शुल्क प्रदान की जाती है। ताकि गरीबी किसी बच्चे के सपनों को न रोक सके।

स्वर्णकार ने शिक्षा के साथ समाजसेवा को भी संगठित स्वरूप देने के लिए आदिब्रह्मा आदिनाथ फाउंडेशन (रजि.) की स्थापना की। इस संस्था के माध्यम से उन्होंने भींडर और आसपास की झुग्गी-झोपड़ियों, बस्तियों और कमजोर वर्ग के परिवारों तक राहत और सहयोग का निरंतर प्रवाह बनाए रखा। संस्थान द्वारा समय-समय पर राशन किट, कंबल, कपड़े, मिठाई पैकेट, उपयोगी वस्तुएं, बच्चों के लिए स्कूल किट और शैक्षिक सामग्री वितरित की जाती है। उनके कार्यों से प्रेरित होकर अनेक भामाशाह भी इस मुहिम से जुड़े हैं।

अनिल स्वर्णकार को शिक्षा एवं समाजसेवा में 100 से अधिक मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है। संत सुनील सागरजी गुरुदेव की प्रेरणा से उन्हें “शिक्षक गौरव उपाधि” प्राप्त हुई, वहीं आचार्य शशांक सागर महाराज के सान्निध्य में कोटा में “विद्यालय प्रबंधक रत्न सम्मान” से भी अलंकृत किया गया।
स्वर्णकार ने शिक्षा को व्यापक रूप देने के लिए भींडर के शिकारवाड़ी क्षेत्र में आधुनिक सुविधाओं से युक्त नया भवन निर्मित कराया है। इस भवन में आठ सुसज्जित कक्षाएं, पुस्तकालय, खेल मैदान, प्रत्येक कमरे में पंखे-लाइट, सीसीटीवी सुरक्षा व्यवस्था, आकर्षक पेंटिंग, खेल सामग्री, वाटर कूलर और छोटे बच्चों के लिए LED आधारित स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। अगले सत्र से यह भवन 100 से अधिक बच्चों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करेगा।
स्वर्णकार का जीवन—विनम्रता, व्यवहार, तत्परता और सेवा—का समन्वित रूप है। वे न केवल शिक्षक बल्कि समाज के लिए प्रेरक वक्ता, मंच-संचालक और विश्वसनीय सेवाकार्य अधीनस्थ के रूप में हर समय उपलब्ध रहते हैं। किसी जरूरतमंद को सहायता की आवश्यकता हो तो स्वर्णकार और उनकी टीम हमेशा सबसे पहले आगे आते हैं।
समाज के प्रबुद्धजनों के अनुसार, अनिल स्वर्णकार का यह समर्पण केवल सेवा नहीं, बल्कि एक दीर्घकालीन सामाजिक परिवर्तन अभियान है, जो आने वाली पीढ़ियों के जीवन की दिशा बदल रहा है। शिक्षा, मानवता और सामाजिक उत्तरदायित्व का यह संगम वास्तव में एक जीवंत मिसाल है।

