कागजों में डिलीवरी, अस्पताल में डॉक्टर नदारद
टोकर पीएचसी पर स्वास्थ्य विभाग का सख्त एक्शन
शून्य प्रसव और बिना सूचना अनुपस्थित स्टाफ पर बीसीएमओ सख्त, प्रभारी सहित चार कार्मिकों को नोटिस, वेतन रोकने की चेतावनी
सेमारी/सलूंबर । ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की वास्तविक स्थिति टोकर में सामने आ गई है। डिलीवरी प्वाइंट घोषित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र टोकर में एक भी प्रसव दर्ज नहीं है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी और स्टाफ ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए। इस गंभीर लापरवाही को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
कलेक्टर की नाराजगी के बाद विभाग सक्रिय
खंड मुख्य चिकित्सा अधिकारी सेमारी द्वारा 10 जनवरी 2026 को जारी आदेश में बताया गया कि पीएचसी टोकर को डिलीवरी प्वाइंट घोषित किया गया है, इसके बावजूद वहां एक भी प्रसव नहीं हो रहा है। दिसंबर 2025 में आयोजित जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में जिला कलेक्टर ने इस स्थिति पर गहरी नाराजगी जताई थी। आदेश में प्रभारी चिकित्सा अधिकारी को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि शीघ्र डिलीवरी सेवाएं शुरू नहीं हुईं, तो आगामी बैठक में जिला कलेक्टर के समक्ष व्यक्तिगत रूप से जवाब देना होगा।
औचक निरीक्षण में खुली पोल
5 जनवरी 2026 को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सलूंबर द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में प्रभारी चिकित्सा अधिकारी सहित प्रमुख स्टाफ बिना स्वीकृत अवकाश के ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए। इस गंभीर लापरवाही पर बीसीएमओ कार्यालय ने चारों कार्मिकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
नोटिस पाने वाले कार्मिक
डॉ. गोपाल कृष्ण मेहता – चिकित्सा अधिकारी प्रभारी
प्रभु लाल – सीनियर नर्सिंग ऑफिसर
गणेश लाल – सीनियर नर्सिंग ऑफिसर
लीला परमार – एलएचवी
तीन दिन का अल्टीमेटम
चारों कार्मिकों को तीन दिवस में स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में वेतन रोका जाएगा तथा नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी उठ चुके हैं सवाल
पीएचसी टोकर का स्टाफ पूर्व में भी लापरवाही को लेकर विवादों में रहा है। सितंबर 2024 में ग्रामीणों ने अव्यवस्थाओं से परेशान होकर पीएचसी का घेराव किया था। इसके बावजूद हालात में कोई सुधार नहीं हुआ। कागजी रिकॉर्ड में डिलीवरी दर्शाकर सरकारी तंत्र और आमजन को गुमराह करने की स्थिति सामने आ रही है।
स्वास्थ्य विभाग का स्पष्ट संदेश
स्वास्थ्य विभाग ने साफ कर दिया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर औपचारिकता और लापरवाही अब स्वीकार नहीं की जाएगी। विभाग का उद्देश्य कागजों में नहीं, बल्कि धरातल पर प्रभावी और जिम्मेदार स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करना है।

