डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ के सान्निध्य में श्रद्धा और गौरव के साथ मनाई गई महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती
मोती मगरी स्मारक पर 486 दीप प्रज्ज्वलित, 486 किलो लड्डुओं का भोग अर्पित, युवाओं को राष्ट्रसेवा का संदेश
उदयपुर। भारतीय पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया के पावन अवसर पर महाराणा प्रताप स्मारक समिति, मोती मगरी द्वारा वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती श्रद्धा, भक्ति और गौरवपूर्ण वातावरण में मनाई गई। समारोह में मेवाड़ के 77वें श्री एकलिंग दीवान एवं महाराणा प्रताप के वंशज श्रीजी हुजूर डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ की विशेष उपस्थिति रही।
जयंती समारोह के दौरान मोती मगरी स्थित महाराणा प्रताप की भव्य अश्वारूढ़ प्रतिमा को आकर्षक पुष्प सज्जा एवं माल्यार्पण से अलंकृत किया गया। डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ की ओर से विशेष पूजा-अर्चना कर श्रद्धासुमन अर्पित किए गए।
इस अवसर पर महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती के उपलक्ष्य में 486 दीप प्रज्ज्वलित किए गए तथा 486 किलोग्राम लड्डुओं का विशेष भोग अर्पित किया गया। स्मारक परिसर में दिनभर श्रद्धालुओं, पर्यटकों एवं इतिहास प्रेमियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही और पूरा वातावरण राष्ट्रभक्ति एवं श्रद्धा से ओत-प्रोत दिखाई दिया।
महाराणा प्रताप स्मारक समिति के प्रशासनिक अधिकारी मानवेन्द्र सिंह ने बताया कि समिति के अध्यक्ष डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ के निर्देशानुसार जयंती के अवसर पर प्रातः 8 बजे से सायं 6 बजे तक सभी श्रद्धालुओं एवं दर्शनार्थियों के लिए निःशुल्क प्रवेश की व्यवस्था की गई थी।
इस अवसर पर डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन त्याग, स्वाभिमान, राष्ट्रनिष्ठा और संघर्ष की अमर गाथा है। युवा पीढ़ी उनके आदर्शों को आत्मसात कर राष्ट्र निर्माण, समाजसेवा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाए। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन आज भी प्रत्येक भारतीय को राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने, कठिन परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों पर अडिग रहने तथा स्वाभिमान के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देता है।

