सपा सांसद रामजीलाल सुमन के खिलाफ संसदीय कानून के तहत कार्रवाई की मांग
उदयपुर। सपा सांसद रामजी लाल सुमन द्वारा द्वारा संसद में वीर राणा सांगा को लेकर दिए गए बयान के विरोध में शुक्रवार 4 अप्रैल को उदयपुर में जंगी प्रदर्शन किया जाएगा। सर्व समाज की ओर से यह आंदोलन किया जा रहा है जिसमें कई संगठनों के कार्यकर्ताओं की भागीदारी होगी।
गुरुवार को इस संबंध में आयोजित प्रेस वार्ता में सर्व समाज के पदाधिकारियों ने यह जानकारी दी और शहर के तमाम संगठनों से इस आंदोलन में शरीक होने की अपील की। इस दौरान भरत कुमावत राष्ट्रीय संगठन मंत्री, राष्ट्रीय लोक अधिकार मंच, डॉ. गोविंद सिंह सोलंकी, अर्जुन सिंह गढ़पुरा अध्यक्ष, श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना, यशवर्धन राणावत संगठन मंत्री, मेवाड़ क्षत्रिय महासभा संस्थान, प्रवीण सिंह झाला अध्यक्ष श्री राजपुत करणी सेना, लक्ष्मण सिंह करणी सेना सदस्य आदि ने संबोधित किया। कई पदाधिकारी उपस्थित थे। संयोजक डॉ गोविन्द सिंह सोलंकी ने बताया कि शुक्रवार प्रातः दस बजे टाऊन हॉल स्थित शहीद स्मारक पर सुबह 10 बजे अनेक कार्यकर्ता एकत्र होंगे। वहां से स्वाभिमान आक्रोश रैली निकाली जाएगी जो बापू बजार होकर जिला कलेक्ट्री पर पहुंचेगी। वहां प्रदर्शन के बाद कलेक्टर के जरिए राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा जायेगा।
पदाधिकारियों ने कहा कि सपा सांसद रामजी लाल सुमन के वक्तव्य के लिए संपूर्ण संसद जिम्मेदार है। इसके लिए सपा सांसद के खिलाफ संसदीय कानून के तहत विशेषाधिकार का दुरुपयोग कर राष्ट्रीय सुरक्षा को आघात पहुंचाने की धाराओं में कार्यवाही होनी चाहिए। संपूर्ण भारतवर्ष के इतिहास में सर्वाधिक गौरवशाली इतिहास मेवाड़ का रहा है। संपूर्ण मानवीय शिखर मूल्य चाहे आदर्श राजतंत्र व्यवस्था से जुड़े हो, या राज्य और राष्ट्र की सेवा में रत विभूतियां हो, महाराणा स्वयं हो या त्याग, तपस्या, बलिदान, स्वामी भक्ति और राष्ट्रभक्ति की बात हो मेवाड़ के ऐतिहासिक व्यक्तित्वों ने अपने उज्ज्वल चरित्र को साक्षात करते हुए संपूर्ण वैश्विक उदाहरण में सर्वोपरि अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित किया है इसीलिए मेवाड़ का इतिहास सदैव से सम्माननीय, पूजनीय रहा है।
पदाधिकारियों ने कहा कि केवल फौरी तौर पर माफी मांगने से काम नहीं चलेगा, जिसमें एक तरफ माफी और दूसरी तरफ यह कहा जाए कि तथ्य गलत नहीं है। सपा सांसद को इस गलती के लिए तब तक माफी नहीं किया जाएगा जब तक कि वह राणा सांगा की मूर्ति के नीचे ग्यारह बार नाक रगडकर माफी नहीं मान नहीं मांग ले।