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एसबीआई के पूर्व एजीएम अनिल कुमार जैन की 3.01 करोड़ रुपये की संपत्ति ईडी ने की अटैच

Reported By : Padmavat Media
Published : June 11, 2026 11:16 PM IST
Updated : June 11, 2026 11:48 PM IST

ईडी कार्रवाई | आय से अधिक संपत्ति मामला

एसबीआई के पूर्व एजीएम की 3.01 करोड़ रुपये की संपत्ति ईडी ने की अटैच, आय से 481 प्रतिशत अधिक संपत्ति का मामला


सीबीआई की प्राथमिकी के आधार पर कार्रवाई, हवाला नेटवर्क और शेल कंपनी के जरिए अवैध आय को वैध बनाने के आरोप

भोपाल। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के भोपाल जोनल कार्यालय ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के लोकल हेड ऑफिस, भोपाल में पूर्व सहायक महाप्रबंधक (एजीएम) रहे अनिल कुमार जैन की लगभग 3.01 करोड़ रुपये मूल्य की चल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत 10 जून 2026 को की गई।

ईडी ने जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), एसीबी भोपाल द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर शुरू की थी। सीबीआई ने अनिल कुमार जैन के खिलाफ ज्ञात आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।

ईडी की जांच में सामने आया कि 1 अप्रैल 2017 से 31 दिसंबर 2018 की जांच अवधि के दौरान अनिल कुमार जैन ने लगभग 3.01 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की, जो उनकी ज्ञात वैध आय से करीब 481 प्रतिशत अधिक थी। जांच एजेंसी के अनुसार यह संपत्ति उनकी वैध आय के अनुपात में अत्यधिक और संदिग्ध पाई गई।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि अनिल कुमार जैन ने अपने तथा अपने परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में लगभग 2.35 करोड़ रुपये नकद जमा कराए। उन्होंने इन नकद जमाओं को अचल संपत्तियों की बिक्री से प्राप्त राशि बताया, लेकिन इसके समर्थन में कोई विश्वसनीय दस्तावेज या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके।

ईडी के अनुसार बाद में इन नकद राशियों को फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडीआर) में परिवर्तित कर दिया गया, जिससे अपराध से अर्जित आय को वैध स्वरूप देने का प्रयास किया गया। इसके अतिरिक्त करीब 66 लाख रुपये की एफडीआर भी जांच में आय से अधिक संपत्ति के रूप में सामने आई।

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि अनिल कुमार जैन ने कुछ हवाला कारोबारियों और एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के साथ मिलकर अवैध आय को वैध दर्शाने की साजिश रची। इसके लिए उन्होंने एम/एस एक्सीलेंट इंफ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड नामक एक शेल कंपनी के माध्यम से अचल संपत्तियों की कथित बिक्री का सहारा लिया। जांच में पाया गया कि यह कंपनी वास्तविक व्यावसायिक गतिविधियों से रहित थी और इसके निदेशक अखिलेश चौधरी कथित तौर पर डमी निदेशक के रूप में कार्य कर रहे थे।

ईडी ने पाया कि कथित संपत्ति बिक्री के एवज में प्राप्त नकद राशि का दावा भी संदिग्ध है और इसके समर्थन में कोई ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं कराया गया। जांच में प्राप्त तथ्यों के आधार पर ईडी ने अपराध से अर्जित आय मानते हुए लगभग 3.01 करोड़ रुपये की एफडीआर को पीएमएलए की धारा 5(1) के तहत अटैच कर लिया है, ताकि संपत्तियों के हस्तांतरण, छिपाने या निपटान को रोका जा सके तथा भविष्य में जब्ती की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

ईडी अधिकारियों के अनुसार मामले में धन के स्रोत, संबंधित व्यक्तियों तथा अन्य संभावित संपत्तियों की जांच जारी है।

रिपोर्ट : पदमावत मीडिया

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