जीवों के प्रति दया मानव का नैतिक दायित्व : हार्दिक हुंडिया की बॉम्बे उच्च न्यायालय में जनहित याचिका
मुंबई। जीव दया और करुणा के महत्व को लेकर मुंबई निवासी व जैन धर्म के अनुयायी हार्दिक हुंडिया ने बॉम्बे उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की है। याचिका में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21, 25, 48 एवं 51 (ए) (जी) के तहत दिए गए मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों का हवाला देते हुए मुंबई के कबूतरखानों में कबूतरों के संरक्षण एवं उचित प्रबंधन की मांग की गई है।
यह याचिका महाराष्ट्र राज्य के नगर आयुक्त, पुलिस आयुक्त, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय, कृषि विभाग, भारतीय पशु कल्याण बोर्ड, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के खिलाफ दायर की गई है।
हार्दिक हुंडिया ने न्यायालय से आग्रह किया है कि संबंधित विभाग, धार्मिक संगठनों एवं पर्यावरण विशेषज्ञों द्वारा याचिका में प्रस्तुत तथ्यों का गंभीरतापूर्वक मूल्यांकन कर मुंबई के पक्षी-आहार क्षेत्रों के लिए न्यायसंगत, संतुलित एवं दीर्घकालीन नीति बनाई जाए।
याचिका में यह भी कहा गया है कि कबूतरखानों में कबूतरों को दाना डालने पर लगे प्रतिबंध तथा उल्लंघन पर लगाए गए जुर्माने मनमाने और अनुचित हैं, जो संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), 21 (जीवन का अधिकार) एवं 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) का उल्लंघन करते हैं। अतः इन्हें अवैध घोषित किया जाना चाहिए।
इसके अलावा, याचिका का निपटारा 13 अगस्त 2025 को होने वाली अगली सुनवाई के साथ जोड़े जाने का भी अनुरोध किया गया है। यह याचिका अधिवक्ता ओमी मेहता द्वारा दायर की गई है तथा तर्क-वितर्क आशीष मेहता एवं ओमी मेहता लीगल फर्म द्वारा प्रस्तुत किए जाएंगे।
हार्दिक हुंडिया का कहना है कि “प्रत्येक जीव का प्रति दया दिखाना न केवल एक धार्मिक आस्था है बल्कि संविधान द्वारा भी यह नैतिक दायित्व है। सभी नागरिकों को जीवदया के लिए जागरूक और संवेदनशील होना चाहिए ताकि सामाजिक और र्यावरणीय संतुलन बना रहे।”

