महिला गरिमा पर डिजिटल हमला! सोशल मीडिया की अश्लीलता पर कड़ा प्रहार, पवन जैन पदमावत ने राष्ट्रपति को भेजा शिकायती पत्र
ट्विटर (X) पर महिला गरिमा के विरुद्ध फैल रही अशोभनीयता पर जताई चिंता, कड़ी कार्यवाही की उठाई मांग
नई दिल्ली । सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (X) पर महिलाओं के खिलाफ फैल रही अभद्र, अशोभनीय और अपमानजनक वीडियो सामग्री को लेकर देशभर में गहरी चिंता और आक्रोश का माहौल है। इस गंभीर विषय पर एंटी करप्शन एंड क्राइम कंट्रोल कमेटी के मीडिया सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन जैन पदमावत ने देश की राष्ट्रपति को विस्तृत शिकायती पत्र भेजते हुए गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय महिला आयोग सहित संबंधित मंत्रालयों को इस विषय पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की है।
पवन जैन पदमावत ने पत्र में लिखा है कि ट्विटर पर कुछ यूज़र्स जानबूझकर ऐसे दृश्य अपलोड कर रहे हैं, जो महिला गरिमा, समाज की मर्यादा और भारतीय संस्कृति को आहत करते हैं। ये वीडियो न केवल नैतिक पतन का प्रतिबिंब हैं, बल्कि क़ानून और संवैधानिक मूल्यों का भी खुला उल्लंघन हैं।
उन्होंने पत्र में स्पष्ट कहा कि यदि ऐसे डिजिटल मंचों पर सख्त और समयबद्ध कार्यवाही नहीं की गई, तो यह पीढ़ियों की सोच और सामाजिक तानेबाने को भीतर तक हिला देगा। साथ ही भारत की डिजिटल प्रतिष्ठा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर क्षति पहुँचा सकता है।
शिकायत पत्र में उठाई गई मुख्य माँगें –
- ऐसे सभी सोशल मीडिया अकाउंट्स की तत्काल पहचान और जांच हो।
- जो भी अकाउंट अशोभनीय/आपत्तिजनक दृश्य पोस्ट कर रहे हैं, उन्हें स्थायी रूप से प्रतिबंधित किया जाए।
- सरकार द्वारा सोशल मीडिया की निगरानी और नियंत्रण हेतु एक मजबूत तंत्र विकसित किया जाए।
- सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, आईटी मंत्रालय और गृह मंत्रालय इस विषय पर संयुक्त कार्यवाही करें।
पवन जैन पदमावत ने पत्र में यह भी कहा कि ट्विटर (X) जैसे मंचों पर आम नागरिकों से लेकर महिला अधिकारी, छात्राएं, गृहणियां, सरकारी कर्मचारी और बच्चों तक की मौजूदगी है। ऐसे में सार्वजनिक रूप से इस प्रकार की सामग्री का प्रसार देश की डिजिटल मर्यादा, संवैधानिक गरिमा और सांस्कृतिक आधारों को हिला सकता है।
उनका कहना है कि यह केवल एक मंच का दुरुपयोग नहीं, बल्कि एक सुनियोजित नैतिक हमला है, जिसका मुंहतोड़ उत्तर अब संवैधानिक स्तर पर देना आवश्यक हो गया है।
उन्होंने यह भी निवेदन किया है कि भारत की राष्ट्रपति इस विषय पर गंभीर संज्ञान लेकर संबंधित मंत्रालयों को त्वरित दिशा-निर्देश जारी करें ताकि डिजिटल प्लेटफॉर्म सुरक्षित, मर्यादित और समाजोपयोगी बन सकें।
यह शिकायत केवल एक संस्था का नहीं, बल्कि देश की लाखों महिलाओं और नागरिकों की ओर से उठाई गई एक बुलंद आवाज है, जो अब संविधान के दरवाज़े पर दस्तक दे चुकी है।

