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बरसात के लिए शिवालयों में जलाभिषेक, गोमती नदी में रत्ती भर भी नहीं पानी

Reported By : Pavan Jain Padmavat
Published : July 21, 2025 11:32 PM IST
Updated : July 21, 2025 11:33 PM IST

बरसात के लिए शिवालयों में जलाभिषेक, गोमती नदी में रत्ती भर भी नहीं पानी

दक्षिण मेवाड़ में आधा सावन बीता, अब तक नहीं बरसी मेघों की कृपा

संवाददाता: दीपक शर्मा

कानोड़। देश के कई हिस्सों में जहां मानसून ने राहत पहुंचाई है, वहीं दक्षिण मेवाड़ के कानोड़ क्षेत्र में आधा सावन बीत जाने के बावजूद बारिश नहीं होने से क्षेत्रवासियों में चिंता बढ़ती जा रही है। क्षेत्र के नदी-नाले, कुएं, बावड़ियां और तालाब पूरी तरह सूख चुके हैं। जलदाय विभाग अब भी टैंकरों से जल आपूर्ति कर रहा है।

कृषक वर्ग सहित आमजन बारिश की प्रतीक्षा में अब धार्मिक अनुष्ठानों का सहारा ले रहा है। आसपास के शिवालयों और देवालयों में विशेष पूजा-अर्चना के साथ जलाभिषेक कर इंद्रदेव को प्रसन्न करने की कोशिशें की जा रही हैं।

शिवलिंग को जल में डुबोकर की विशेष पूजा
प्राचीन राणा कुंभा कालीन केरेश्वर महादेव मंदिर, जो गोमती नदी के तट पर स्थित है, वहां श्रावण मास के दूसरे सोमवार को श्रद्धालुओं ने शिवलिंग को जल में पूर्णतः डुबोकर जलाभिषेक किया। मंदिर परिसर में महिला-पुरुषों ने सामूहिक रूप से भजन-कीर्तन कर मेघों से कृपा की प्रार्थना की।

मंदिर में आचार्य मुकुन्द प्रसाद अपनी मण्डली के साथ बैठकर शिव मंत्रों का जाप करते हुए बारिश की कामना करते नजर आए। उन्होंने बताया कि इस वर्ष नदी में पानी नहीं होने के कारण श्रावण मास में कालसर्प दोष निवारण व अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में भी बाधा आ रही है।

इक्कीस विप्र समूहों ने किया धर्मराज अभिषेक
कानोड़ नगर स्थित धर्मराज मंदिर में भी बरसात की कामना के लिए विशेष अभिषेक अनुष्ठान का आयोजन किया गया। आचार्य राजेन्द्र व्यास के नेतृत्व में 21 विप्रों के समूह ने वैदिक मंत्रों के साथ धर्मराज अभिषेक संपन्न कराया।

चौबीसा समाज के महेन्द्र जोशी ने बताया कि बरसात के लिए नगर के ब्रह्मपुरी सहित सभी प्रमुख मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जा रहे हैं।

जयसमंद झील का स्रोत भी शुष्क
एशिया की प्रसिद्ध मीठे पानी की जयसमंद झील को जल प्रदान करने वाली गोमती नदी में इस वर्ष अब तक रत्ती भर भी पानी नहीं आया है। उल्लेखनीय है कि इतिहास में राणा कुंभा ने इसी नदी के अर्जुन वृक्ष के नीचे स्नान कर चर्म रोग से मुक्ति पाई थी।

क्षेत्रवासियों को अब भी आस है कि श्रद्धा और आस्था से की जा रही प्रार्थनाएं जल्द ही फलीभूत होंगी और सावन के शेष दिनों में मेघों की कृपा से धरती भीग उठेगी।

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