उदयपुर में विराजमान राष्ट्रसंत आचार्य श्री पुलक सागर जी मुनिराज के पावन सान्निध्य में धर्मप्रेमियों को मिला दिव्य आध्यात्मिक अनुभव
गुरुवार को पवन जैन पदमावत ने किया दर्शन, गुरुदेव से प्राप्त आशीर्वाद से आत्मा हुई अभिभूत
उदयपुर । धर्म, तप और संयम की दिव्य चेतना को मूर्त रूप देने वाले भारत गौरव राष्ट्रसंत आचार्य श्री पुलक सागर जी मुनिराज इन दिनों उदयपुर नगर में विराजमान हैं। उनके पावन सान्निध्य में प्रतिदिन श्रद्धालु धर्म लाभ ले रहे हैं, और गुरुदेव के तपोदीप्त तेजस्वी स्वरूप से आत्मिक ऊर्जा प्राप्त कर रहे हैं।
गुरुवार को पदमावत मीडिया के प्रधान सम्पादक एवं एंटी करप्शन एंड क्राइम कंट्रोल कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मीडिया सेल के पवन जैन पदमावत ने राष्ट्रसंत के दर्शन कर उनके पावन चरणों में नमन किया और दिव्य आशीर्वाद प्राप्त किया। दर्शन के पश्चात उन्होंने अपने भाव प्रकट करते हुए कहा परम पूज्य गुरुदेव से प्राप्त मंगल आशीर्वाद आत्मा को शांति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देता है। उनके तपोदीप्त स्वरूप और संयममय जीवन के समक्ष सिर श्रद्धा से स्वतः झुक जाता है। ऐसे संतशिरोमणि को कोटिशः नमन एवं उनके चरणों में बारंबार वंदन करता हूँ।
गुरुदेव श्री पुलक सागर जी मुनिराज के संयम, साधना और सत्यपथ के संदेश ने न केवल जैन समाज को, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग को आत्मकल्याण और राष्ट्रनिर्माण की प्रेरणा दी है। वे अपने प्रवचनों में प्रायः करुणा, अहिंसा, संयम और सदाचार के महत्व को रेखांकित करते हैं।
उनके सान्निध्य में रहने वाले श्रद्धालु बताते हैं कि उनका एक-एक शब्द आत्मा को भीतर से झकझोर देता है और जीवन को नया दृष्टिकोण देता है। वे कर्मों की निर्जरा, आत्मसाक्षात्कार और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व को प्रमुख विषय बनाकर जनजागृति का कार्य कर रहे हैं।
गुरुदेव के दर्शन हेतु प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनके समक्ष उपस्थित होकर धर्म लाभ प्राप्त कर रहे हैं। उनके दर्शन मात्र से ही भक्तों के हृदय में शांति, श्रद्धा व आनंद की अनुभूति होती है।
नगर के लिए यह अत्यंत सौभाग्य की बात है कि ऐसे दिव्य तपस्वी वर्तमान में उदयपुर में विराजमान है और जनमानस को अध्यात्म, सेवा व संयम की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करवा रहें है।

