उदयपुर पर्यटन की दिशा में अहम बैठक : ढांचागत विकास, झील संरक्षण और सामूहिक प्रयासों पर हुआ मंथन
उदयपुर। फतेहसागर झील के समीप देवाली स्थित होटल द ग्रैंड फतेह में उदयपुर पर्यटन को समर्पित एक महत्वपूर्ण व सकारात्मक बैठक आयोजित हुई। इस ढाई घंटे लंबी बैठक की अध्यक्षता पर्यटन विशेषज्ञ एवं बीसीआई टूरिज्म के अध्यक्ष यशवर्धन राणावत ने की तथा संचालन राणावत एवं सचिव प्रद्युमन सिंह चौहान ने किया।
बैठक में पर्यटन से जुड़े विभिन्न अहम मुद्दों पर समाधान-आधारित गंभीर चर्चा हुई। मुख्य बिंदु रहे –
1. व्यवसाय वृद्धि और अधूरी ढांचागत परियोजनाएँ – धीमी व निम्न गुणवत्ता वाली आधारभूत परियोजनाओं के बीच पर्यटन व्यवसाय को कैसे सुंदरता से टिकाए व बढ़ाए जाए। साथ ही, समय पर और गुणवत्तापूर्ण कार्यों के लिए प्रशासन से समन्वय बढ़ाने पर बल।
2. प्रतिस्पर्धा नहीं, सहयोग की भावना – होटलियर और पर्यटन क्षेत्र के साथियों को प्रतिस्पर्धी नहीं बल्कि साझेदार मानते हुए, संयुक्त अभियानों और पहलों के जरिए उदयपुर पर्यटन को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करना।
3. नए आधुनिक क्षेत्रीय पर्यटन कार्यालय की मांग – स्थानीय प्रतिनिधित्व, तेज़ निर्णय और पर्यटक सुविधा जैसे लाभों के साथ-साथ, वर्तमान कार्यालय के आधुनिक न होने जैसी चुनौतियों पर भी विमर्श।
4. झील संरक्षण एवं घाट विकास – झीलों को उदयपुर की जीवनरेखा मानते हुए वैज्ञानिक डी-वीडिंग, प्रदूषण नियंत्रण और जल के सतत उपयोग पर जोर। घाटों को सांस्कृतिक व पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव।
इस बैठक के विशिष्ट अतिथि विद्या भवन पॉलिटेक्निक संस्थान के प्राचार्य अनिल मेहता ने उदयपुर की झीलों के ऐतिहासिक और वैज्ञानिक महत्व पर सारगर्भित विचार रखे, जिन्हें सभी उपस्थित जनों ने सराहा। मेहता ने झीलों और पारिस्थितिक तंत्र पर वैज्ञानिक शोध के कई तथ्य सदस्यों से साझा किए।
बैठक में पर्यटन क्षेत्र से जुड़े कई अग्रणी लोग, सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी, आर्किटेक्ट, आर्टिस्ट, वकील और शिक्षाविद उपस्थित रहे। प्रमुख सदस्यों में अभिनव सिंह परिहार, ब्रिगेडियर हर्षवर्धन सिंह, आदित्य सिंह पंवार, सुल्तान सिंह, कर्नल कमलदीप सिंह, कर्नल अजीत सिंह, संयम जैन, ओमप्रकाश राठौड़, रमेश दोशी, भूपेंद्र सिंह नारेला, रतन टांक, अखंड प्रताप सिंह, अक्षय भंडारी, सी.पी. अग्रवाल, अनीस अहमद और मुकेश शर्मा सहित अन्य शामिल रहे।
बैठक का निष्कर्ष रहा कि उदयपुर पर्यटन की असली प्रगति एकता, दूरदर्शिता और सतत विकास से ही संभव है। इसके लिए सभी सदस्य पूरे जुनून और कर्मठता से कार्यरत हैं।

