Padmavat Media
महत्वपूर्ण सूचना
धर्म-संसारमहाराष्ट्र

गणेश नगर जैन समाज में जैन पाठशाला के अध्यापक जिनेन्द्र सलिया का भव्य सम्मान

Reported By : Pavan Jain Padmavat
Published : September 1, 2025 12:15 AM IST

पंद्रह वर्षों से नि:शुल्क शिक्षा देकर बच्चों और युवाओं में जैन धर्म व संस्कारों का संचार कर रहे जिनेन्द्र सलिया

गणेश नगर जैन समाज में दशलक्षण पर्युषण महापर्व पर भव्य सम्मान ग्रहण करते जैन पाठशाला के अध्यापक जिनेन्द्र सलिया

गणेश नगर जैन समाज में जैन पाठशाला के अध्यापक जिनेन्द्र सलिया का भव्य सम्मान किया

कांदिवली/मुंबई। श्री 1008 आदिनाथ जैन मंदिर (सिद्धा सीब्रुक) एवं लालजी पाड़ा/गणेश नगर, दिगम्बर जैन समाज, कांदिवली, मुंबई में चल रहे पर्वाधिराज दशलक्षण पर्युषण महापर्व के अंतर्गत चतुर्थ दिवस (उत्तम शौच धर्म) की आराधना भक्ति और उल्लास से सम्पन्न हुई।

इस अवसर पर आदर्श दिगम्बर जैन पाठशाला, गणेश नगर के अध्यापक जिनेन्द्र सलिया का समाज की ओर से सम्मान किया गया। उन्हें राजस्थानी पगड़ी पहनाकर, शॉल ओढ़ाकर एवं सम्मान पत्र प्रदान कर आत्मीयता से सम्मानित किया गया। इस दौरान समाजजनों ने उत्साहपूर्वक तालियों की गड़गड़ाहट से उनका अभिनंदन किया।

पंद्रह वर्षों से नि:शुल्क शिक्षा का सतत् योगदान

जिनेन्द्र सलिया वर्ष 2009 से लगातार नि:शुल्क जैन पाठशाला शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में प्रत्येक रविवार को 80 से अधिक श्रावक-श्राविकाएँ जैन धर्म, उसके सिद्धांत, दर्शन, पूजा-पाठ और आदर्श जीवनशैली की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। बच्चों, महिलाओं और युवाओं में जैन धर्म के प्रति जागृति और संस्कारों का बीजारोपण कराने में उनका योगदान अविस्मरणीय है।

समाजजनों ने कहा कि जिनेन्द्र सलिया केवल शिक्षक ही नहीं, बल्कि समाज के मार्गदर्शक हैं। वे नई पीढ़ी को धर्म और संस्कृति से जोड़कर उन्हें आदर्श जीवन की राह दिखा रहे हैं। उनका यह योगदान अमूल्य है और आने वाले वर्षों तक समाज के लिए प्रेरणा बना रहेगा।

जैन पाठशाला के श्रावक-श्राविका

इस अवसर पर उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने भी अपनी भावनाएँ व्यक्त करते हुए कहा कि जिनेन्द्र सलिया का यह सम्मान वास्तव में समाज की आस्था, कृतज्ञता और धर्म के प्रति समर्पण का प्रतीक है। उनकी सेवा भावना से प्रेरणा लेकर और भी अधिक परिवार अपने बच्चों को पाठशाला से जोड़े।

दशलक्षण महापर्व का चतुर्थ दिवस — उत्तम शौच धर्म केवल बाहरी शुद्धि नहीं बल्कि आंतरिक निर्मलता का भी संदेश देता है। इसी भावना को आत्मसात करते हुए समाज ने पाठशाला के अध्यापक का सम्मान कर यह सिद्ध किया कि सच्ची शुद्धि केवल आत्मा में नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कार और सेवा में भी निहित है।

Related posts

भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिऐ मिलकर लड़ेंगे तो पक्का मिलेगी कामयाबी – पवन जैन पदमावत

Padmavat Media

गणेश चतुर्थी पर झल्लारा थाने में गूंजे गणपति बप्पा के जयकारे | पुलिस परिवार ने किया भक्ति-भाव से पूजन

Pavan Jain Padmavat

गंगा समग्र द्वारा रिवरफ्रंट में साबरमती नदी आरती का भव्य आयोजन, विशाल संख्या में श्रद्धालुओं उपस्थित ….

Padmavat Media

Leave a Comment

error: Content is protected !!