कानोड़ प्रवास के दूसरे दिन पवन जैन पदमावत ने किया 12वीं सदी के जैन तीर्थ का दर्शन, प्राचीन कला पर जताया आश्चर्य
कानोड़/उदयपुर । पदमावत मीडिया के प्रधान संपादक एवं एंटी करप्शन एंड क्राइम कंट्रोल कमेटी के मीडिया सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन जैन पदमावत अपने दो दिवसीय कानोड़ प्रवास के दूसरे दिन ऐतिहासिक एवं प्राचीन श्री आदेश्वर जैन श्वेताम्बर तीर्थ, राजपुरा (कानोड़) पहुँचे। यहाँ उन्होंने प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के दर्शन कर क्षेत्र की सुख-शांति, धर्मप्रभावना और जनकल्याण की मंगलकामनाएँ कीं। इस दौरान कानोड़ से पदमावत मीडिया के संवाददाता दीपक शर्मा भी साथ रहे।
मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही पवन जैन पदमावत का ध्यान 12वीं सदी की प्राचीन कला और पत्थर नक्काशी की अद्भुत बारीकियों पर गया। दीवारों, स्तंभों, गुम्बदों और तोरणों पर की गई सूक्ष्म शिल्पकला को देखकर उन्होंने गहरा आश्चर्य व्यक्त किया। उन्होंने कहा उस युग में बिना आधुनिक उपकरणों के इतने सुंदर और जीवन्त शिल्प निर्माण करना जैन वास्तुकला की महानता सिद्ध करता है।
मंदिर सहयोगियों ने उन्हें तीर्थ के इतिहास, स्थापना वर्ष, प्राचीन घटनाओं, साधु-साध्वियों की तप-साधना और विकास कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। पवन जैन पदमावत ने इस धरोहर के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि ऐसे पवित्र स्थल इतिहास की असली पहचान होते हैं—इनका संरक्षण समाज का कर्तव्य है।
उन्होंने मंदिर परिसर में सफाई, पर्यावरण, संरचनात्मक संरक्षण और दर्शनार्थियों की सुविधा को लेकर भी सुझाव दिए। उनका कहना था कि आने वाली पीढ़ियों को संस्कृति से जोड़ने के लिए इस तीर्थ को विश्वस्तरीय पहचान दिलाई जा सकती है।
दर्शन के दौरान पवन जैन पदमावत ने परिसर में व्याप्त शांति, आध्यात्मिकता, पवित्रता और प्राचीन वास्तुकला की भव्यता का विशेष अनुभव किया। उन्होंने कहा कि ऐसे पवित्र स्थलों का दर्शन जीवन में ऊर्जा, विनम्रता और नई दिशा प्रदान करता है।
कानोड़ प्रवास का दूसरा दिन धर्म, संस्कृति, इतिहास और आध्यात्मिकता के अद्भुत संगम के रूप में यादगार बनकर दर्ज हो गया।

