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CBI की बड़ी कार्रवाई: 23 साल बाद 2002 के आयात-निर्यात धोखाधड़ी मामले में अमेरिका से फरार महिला को भारत लाया गया

Reported By : Padmavat Media
Published : July 9, 2025 1:16 PM IST
Updated : July 9, 2025 1:17 PM IST

CBI की बड़ी कार्रवाई: 23 साल बाद 2002 के आयात-निर्यात धोखाधड़ी मामले में अमेरिका से फरार महिला को भारत लाया गया

नई दिल्ली । केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने 23 साल पुराने आर्थिक अपराध मामले में बड़ी सफलता हासिल करते हुए अमेरिका से वांछित भगोड़ी महिला मोनिका कपूर को भारत प्रत्यर्पित कर लिया है। यह मामला वर्ष 2002 में दर्ज हुआ था और मोनिका कपूर तब से फरार चल रही थी।

सीबीआई के अनुसार, मोनिका कपूर, जो कि M/s Monika Overseas की प्रोप्राइटर है, ने अपने भाइयों राजन खन्ना और राजीव खन्ना के साथ मिलकर वर्ष 1998 में आयात-निर्यात दस्तावेजों जैसे कि शिपिंग बिल्स, इनवॉयस और बैंकों के फर्जी प्रमाणपत्र तैयार किए। इस फर्जीवाड़े के माध्यम से उन्होंने 2.36 करोड़ रुपये मूल्य के शुल्क मुक्त सोने के आयात के लिए 6 रिप्लेनिशमेंट (Rep.) लाइसेंस प्राप्त किए।

आरोपियों ने बाद में उक्त लाइसेंस अहमदाबाद की M/s Deep Exports को प्रीमियम पर बेच दिए, जिसने इन लाइसेंसों का उपयोग कर शुल्क मुक्त सोना आयात किया, जिससे सरकारी खजाने को 1.44 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

सीबीआई ने मामले की जांच पूरी करने के बाद 31 मार्च 2004 को मोनिका कपूर, राजन खन्ना और राजीव खन्ना के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 420, 467, 468 और 471 के तहत आरोप पत्र दाखिल किया था।

दिल्ली के साकेत जिला न्यायालय की मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अदालत ने 20 दिसंबर 2017 को राजन खन्ना और राजीव खन्ना को दोषी ठहराया था।

वहीं, मोनिका कपूर जांच और मुकदमे में शामिल नहीं हुई और 13 फरवरी 2006 को अदालत द्वारा उसे घोषित अपराधी (Proclaimed Offender) घोषित किया गया। बाद में 26 अप्रैल 2010 को उसके विरुद्ध खुला गैर-जमानती वारंट और रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया। सीबीआई ने 19 अक्टूबर 2010 को अमेरिका से उसके प्रत्यर्पण का अनुरोध भी भेजा था।

लगातार प्रयासों और अमेरिकी अधिकारियों के साथ समन्वय के बाद, सीबीआई की एक टीम अमेरिका गई और मोनिका कपूर की हिरासत में लेकर उसे भारत वापस लाया गया। अब मोनिका कपूर को संबंधित अदालत में पेश किया जा रहा है, जहां वह वर्षों पुराने मामले में न्यायिक प्रक्रिया का सामना करेगी।

सीबीआई ने इस extradition को कानून की जीत बताते हुए कहा है कि वह भविष्य में भी ऐसे सभी फरार आर्थिक अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की परवाह किए बिना अपने प्रयास जारी रखेगी।

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