मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के प्रयासों से लेक्रॉस में नई उड़ान, राजस्थान बन रहा राष्ट्रीय केंद्र
विश्वस्तरीय सुविधाओं और प्रशिक्षण से निखर रही जनजातीय प्रतिभाएं, लॉस एंजिल्स ओलंपिक-2028 की तैयारियों को मिली गति
जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान में खेलों को नई पहचान मिल रही है। राज्य सरकार की खेल नीति और जनजातीय क्षेत्रों पर विशेष ध्यान का परिणाम है कि राजस्थान का आदिवासी अंचल अब लेक्रॉस जैसे अंतरराष्ट्रीय खेल का राष्ट्रीय केंद्र बनकर उभर रहा है। विश्वस्तरीय खेल सुविधाओं, आधुनिक प्रशिक्षण और अनुभवी प्रशिक्षकों की उपलब्धता से प्रदेश के खिलाड़ी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार सफलता हासिल कर रहे हैं।
राज्य सरकार ने उदयपुर स्थित महाराणा प्रताप खेलगांव में देश की पहली समर्पित लेक्रॉस अकादमी विकसित की है। यहां अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्राकृतिक घास का मैदान, आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं, खेल उपकरण और विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की व्यवस्था की गई है। यह अकादमी विशेष रूप से जनजातीय युवाओं की खेल प्रतिभा को नई दिशा देने का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुकी है।
राजस्थान के खिलाड़ियों का प्रदर्शन लगातार बेहतर हो रहा है। तृतीय राष्ट्रीय लेक्रॉस चैंपियनशिप में प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र के 55 खिलाड़ियों ने छह वर्गों में भाग लेकर 5 स्वर्ण और 1 कांस्य पदक जीतकर प्रदेश का गौरव बढ़ाया। वहीं जून 2024 में आयोजित एशियन महिला लेक्रॉस चैंपियनशिप में राजस्थान की जनजातीय बेटियों ने भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए रजत पदक जीता। फरवरी 2026 में आयोजित एशियन लेक्रॉस गेम्स में भी राजस्थान के खिलाड़ियों ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा।
पिछले तीन वर्षों में राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में राजस्थान ने 22 स्वर्ण पदकों में से 15 स्वर्ण सहित कुल 19 पदक अपने नाम किए हैं, जिससे लेक्रॉस के क्षेत्र में प्रदेश देश के सबसे मजबूत केंद्रों में शामिल हो गया है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि युवाओं के व्यक्तित्व विकास, अनुशासन, आत्मविश्वास और राष्ट्र निर्माण का सशक्त आधार हैं। इसी सोच के साथ राज्य सरकार खिलाड़ियों को आधुनिक प्रशिक्षण, बेहतर संसाधन और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के अवसर उपलब्ध करा रही है।

