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गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति की आत्मा है, यह गुरु के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता का पर्व है — डॉ. भगवान दास वैष्णव

Reported By : Padmavat Media
Published : July 9, 2025 11:36 PM IST
Updated : July 9, 2025 11:38 PM IST

गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति की आत्मा है, यह गुरु के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता का पर्व है — डॉ. भगवान दास वैष्णव

उदयपुर । एंटी करप्शन एंड क्राइम कंट्रोल कमेटी के मीडिया सेल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. भगवान दास वैष्णव ने गुरु पूर्णिमा (10 जुलाई) के पावन पर्व पर समस्त देशवासियों को शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा है, जो गुरु और शिष्य के बीच आध्यात्मिक, नैतिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत बनाती है।

डॉ. वैष्णव ने कहा कि गुरु का स्थान हमारे जीवन में सर्वोच्च है। एक सच्चा गुरु न केवल हमें अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाता है, बल्कि हमें नैतिकता, सेवा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देता है। गुरु पूर्णिमा का पर्व हमारे भीतर विनम्रता, श्रद्धा और कृतज्ञता के भाव जागृत करता है, जिससे हम अपने जीवन में सही दिशा ग्रहण कर पाते हैं।

उन्होंने कहा कि आज के समय में जब समाज विविध चुनौतियों और नैतिक गिरावट से जूझ रहा है, तब गुरुओं का मार्गदर्शन और उनका सान्निध्य जीवन को सकारात्मक ऊर्जा और सही दिशा देने वाला बनता है। ऐसे पर्व हमारे भीतर यह चेतना उत्पन्न करते हैं कि हम अपने गुरुजनों के प्रति केवल श्रद्धा रखें ही नहीं, बल्कि उनके बताए मार्ग को जीवन में आत्मसात भी करें।

डॉ. वैष्णव ने सभी युवाओं से आह्वान किया कि वे गुरु-शिष्य परंपरा की गरिमा को बनाए रखते हुए समाज को नैतिकता, ईमानदारी और सदाचार की दिशा में आगे ले जाने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि गुरु वंदन जैसे आयोजनों से हमारी सनातन परंपरा और अधिक सशक्त होती है और यह आने वाली पीढ़ियों को भी संस्कृति से जोड़े रखने का माध्यम बनते हैं।

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