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बहाने ढूँढता है रंग लेकर यार होली में लुटाये प्यार

Reported By : Padmavat Media
Edited By : Padmavat Media
Published : March 12, 2025 11:13 AM IST
Updated : March 12, 2025 11:15 AM IST

ग़ज़ल

डॉ कामिनी व्यास रावल

बहाने ढूँढता है रंग लेकर यार होली में 
लुटाये प्यार यूँ मुझ पर मेरा दिलदार होली में

सभी को छोड़ कर डाले है मुझ पर रंग वो धानी
करे है प्यार का इस ढंग से इजहार होली में

गिले शिकवे सभी दिल से मिटाओ प्यार से यारो 
बजाओ ढोल, नाचो खू़ब, अब की बार होली में

मिटायें हम सभी इक दूसरे से नफ़रतें यारो
करे कोई किसी से भी नहीं तकरार होली में

सताये एक दूजे को न कोई आज से लोगो
बहारों से भरे जीवन करें सब प्यार होली में

खुशी छाने लगी है हर तरफ अब है फ़िज़ा रंगी 
गुलाबी लाल रंगो की हुई बौछार होली में

क़दम पड़ते नहीं हैं कामिनी अपने ज़मीं पर अब
हुआ है क्या अजब उनका मुझे दीदार होली में 

~ डॉ कामिनी व्यास रावल

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शीर्षक – बचपन बाला रंग

1 comment

Karan Singh Rathore 12/03/2025 at 2:23 PM

Happy Holi

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